केशव मौर्य और साक्षी महाराज के खिलाफ चुनाव आयोग पहुंची बसपा

लखनऊ। विधानसभा चुनाव को लेकर राजनितिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसी क्रम में बसपा ने भाजपा सांसद साक्षी महाराज और प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया है। इससे पहले भाजपा ने मायावती पर जाति और धर्म के आधार पर प्रत्याशी घोषित करने का आरोप लगाते हुए आयोग से शिकायत की थी।

धर्म के आधार पर मतदाताओं को प्रभावित कर रहे हैं साक्षी महाराज

बसपा महासचिव और राज्यसभा सदस्य सतीश चंद्र मिश्र ने बुधवार को लिखित शिकायत करते हुए आयोग से साक्षी महाराज और मौर्य के खिलाफ आरपी ऐक्ट के सेक्शन 16 ए के तहत कार्रवाई करने का आग्रह किया है। मिश्र ने साक्षी महाराज पर धर्म के आधार पर मतदाताओं को प्रभावित करने का आरोप लगाया और कहा कि उनके बयान में एक वर्ग विशेष को निशाने पर रखा गया है जबकि मौर्य ने अपने भाषण में यादव बिरादरी का जिक्र किया था।

इसी बीच भाजपा के प्रदेश महासचिव विजय बहादुर पाठक ने कहा कि यह सभी जानते हैं कि बसपा नेता किस तरह जाति और धर्म के आधार पर भाषण देते हैं। भाजपा चुनाव आचार संहिता का पूरी तरह पालन करती है।

अपने बयान पर कायम हैं साक्षी महाराज

उधर, साक्षी महाराज ने छह जनवरी को मेरठ में दिए अपने भाषण के संबंध में चुनाव आयोग को जवाब दे दिया है। साक्षी महाराज का कहना है कि उन्होंने भाषण में किसी संप्रदाय का नाम नहीं लिया था। आयोग ने साक्षी महाराज को नोटिस जारी कर जवाब देने का आदेश दिया है।

नोटिस पर अपना पक्ष रखने आए साक्षी ने कहा कि बयान में मैंने किसी खास समुदाय का नाम नहीं लिया। मैं संतों के एक कार्यक्रम में बोल रहा था और यह कोई राजनीतिक रैली नहीं थी। मैंने चार बच्चे के लिए जब कहा था, तब भी बवाल मचा था और अब 40 बच्चे नहीं करने के लिए कह रहा हूं तब भी बवाल मचा है। उन्होंने कहा कि मैंने कोई गलत बयान नहीं दिया। जनसंख्या पर नियंत्रण लगना चाहिए। महिलाएं कोई बच्चा पैदा करने की मशीन नहीं है।

निर्वाचन आयोग को जवाब देने के बाद मीडिया से बातचीत में साक्षी महाराज ने कहा कि उनकी टिप्पणी किसी धर्म के विरूद्ध नहीं थी। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने भी 16 हजार शादियां की थीं। साक्षी महाराज ने कहा कि वह अपने बयान पर कायम हैं।

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