गुजरात

चीनी सामानों के बहिष्कार के बीच चीन के निवेशकों को लुभाने में जुटा गुजरात

चीनी सामानों के बहिष्कार

गांधीनगर। स्थानीय व्यापार संगठनों की तरफ से चीनी सामानों के बहिष्कार का निराला असर देखने को मिल रहा है. गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी खुद लोगों से स्वदेशी सामानों को अपनाने की अपील कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल चीन में निवेशकों को लुभाने में जुटा हैं।

गुजरात में हर दो साल पर होने वाली वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल सम्मिट अगले साल जनवरी में होनी है। इसको लेकर गुजरात सरकार के अधिकारी और 20 कंपनियों के प्रतिनिधियों का एक दल पांच दिवसीय चीन के दौरे पर हैं। चीन के निवेशकों के साथ प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की पहले ही कई बैठकें (बिजनेस टू बिजनेस) हो चुकी है।

चीन में उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल की बिजनेस टू बिजनेस मीटिंग्स के बाद गुजरात सरकार के एग्रीकल्चर एंड को-ऑपरेशन विभाग में प्रिंसिपल सेक्रेटरी के पद पर तैनात संजय प्रसाद ने कहा, “हमारे प्रतिनिधिंडल का मुख्य उद्देश्य चीन, हांगकांग और भारत के बीच रिश्तों को और मजबूत करना है। इसके लिए गुजरात सभी क्षेत्रों को अपने यहां पर जगह देकर व्यावसायिक संबंधॆं को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।” जनवरी 2017 में होनेवाली वाइब्रेंट समिट में चीन सरकार और उसके व्यावसायिक प्रतिनधिमंडल की गुजरात ही अध्यक्षता करेगा।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर पड़ोसी देश पाकिस्तान का समर्थन करने को लेकर चीन के सामानों का विरोध के बारे में जब राज्य के इंडस्ट्रीज एंड माइन्स विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी पी.के. तनेजा ने कहा, हमारा प्रतिनिधिमंडल चीन में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए गया है ना कि वहां पर चीन का सामान खरीदने के लिए। हम चीन के सामानों की खरीद को बढ़ावा नहीं दे रहे हैं। अगर चीन गुजरात में निवेश करना चाहता है कि और यहां पर उत्पादन करना चाहता है तो उसका स्वागत है।

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