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भारत ने पाक के खिलाफ किया ब्रिक्स समिट का इस्तेमालः चीनी मीडिया

चीनी मीडिया

बीजिंग। चीनी मीडिया ने बुधवार को कहा कि गोवा में ब्रिक्स-बिम्सटेक सम्मेलन के दौरान भारत ने जहां स्वयं को प्रभावी ढंग से ‘सुनहरे अवसर’ वाले देश के रूप रखते हुए एनएसजी की सदस्यता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के दावे को मजबूती से रखा वहीं अपनी कुशलता के कारण उसने पाकिस्तान को मजबूती से एक ‘क्षेत्रीय अछूत’ के रूप में सामने रखा।

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में लिखे गए एक लेख में कहा गया है, ‘पिछले महीने से शुरू हुए भारत-पाक तनाव की असहज को देखते हुए, बिम्सटेक (बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल) में भारत के शामिल रहने का एक अलग तरह का भू-सामरिक असर रहा।’

सफल रहा ब्रिक्स और बिम्सटेक, पाकिस्तान रहा अलग-थलग

इस लेख में लिखा गया है, ‘पाकिस्तान को अलग-थलग करने की दिशा में भारत ने इस्लामाबाद को छोड़कर इस क्षेत्र के सभी देशों को आमंत्रित किया।’ उरी हमले के बाद भारत द्वारा इस्लामाबाद में आयोजित होने वाले दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के शिखर सम्मेलन में भाग नहीं लेने के फैसले का जिक्र करते हुए अखबार ने लिखा है, ‘सार्क सम्मेलन के नहीं होने से भारत को यह दिखाने का एक सुनहरा अवसर मिला था कि वह पाकिस्तान के बिना ही इसी तरह के एक सम्मलेन का आयोजन बिना बाधा के कर सकता है। गोवा सम्मेलन के रूप में बिम्सटेक ने भी एक बड़ा प्रभाव छोड़ा।’

भारत ने चतुराई के साथ कराया ब्रिक्स के साथ बिम्सटेक का आयोजन

लेख में कहा गया है, ‘पिछले सम्मेलनों और गोवा में हुए सम्मेलन में यह अतंर था कि नई दिल्ली ने ब्रिक्स बैठक ही बिम्सटेक का भी आयोजन कर डाला।’ लेख के मुताबिक, क्षेत्रीय देशों- बांग्लादेश, श्रीलंका, थाइलैंड, म्यांमार, नेपाल और भूटान को ब्रिक्स की उभरती हुई आर्थिक अर्थव्यवस्थाओं के साथ लाकर भारत ने एक ‘खोखले और मरणासन्न हो चुके संगठन’ में फिर से जान फूंक दी।

क्षेत्रीय तौर पर प्रभावी संगठन के रूप में उभरे सकता है बिम्सटेक

हालांकि ब्रिक्स के बाकि सदस्यों ने भारत-पाक तनाव को लेकर किसी भी देश का पक्ष नहीं लिया। ग्लोबल टाइम्स के इस लेख में कहा गया है, ‘सार्क की तुलना में बिम्सटेक की संभावना एक अधिक प्रभावी विकल्प के तौर पर हुई है, उपमहाद्वीप में पाकिस्तान के बिना एक समूह का निर्माण बेहतर तरीके से हो रहा है जिसमें भारत का प्रभुत्व छोटे देशों के लिए संदेह और भय बढ़ा सकता है।’

भारत को एनएसजी सदस्यता और यूएनएससी में मददगार हो साबित सकता है बिम्सटेक

यह सम्मेलन भारत को उसकी एनएसजी सदस्यता के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट दिलाने में भी मदद कर सकता है जिसे चीन ने रोका हुआ है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत ने मुखर और समान विचारधारा वाले देशों को साथ लाकर अपनी सुधारवादी मांगों को एक आदर्श व्यवस्था के तहत सामने रखा है। यह साझा मंच भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण बन गया है, विशेषकर कि परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट को हासिल करने को लेकर।

लेख के अनुसार, भारत ने ब्रिक्स के दौरान अन्य ब्रिक्स सदस्यों (ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीक) की तुलना में खुद को सबसे तेज उभरती हई अर्थव्यवस्था के रूप में सामने रखा है। 7.5 फीसद की दर से बढ़ रही अर्थव्यवस्था के रूप में भारत वैश्विक तौर पर मजूबती से उभरा है और तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था में उसने चीन का स्थान ले लिया है।

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