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सपा संग्राम 2, अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव सपा से 6 साल के लिए निष्कासित!

सपा संग्राम

लखनऊ: कुछ दिन पहले ही सपा संग्राम गर्म हुआ था जिसमे चाचा भतीजे की खटास फूट कर राज्य और देश के सामने आई थी और अब फिर एक बार सपा की अंदरूनी फूट छलक रही है.

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जब सपा संग्राम शुरू हुआ था तो अखिलेश और शिवपाल ने एक दूसरे के चहेते और करीबियों को सबसे पहले निशाना बनाया था. अखिलेश पार्टी ऑफिस में नेताजी और शिवपाल के सामने रो भी पड़े थे.

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माना जाता है की पूरा सपा संग्राम अखिलेश यादव को पार्टी के टिकट वितरण में अधिकार दिलाने के लिए हुआ था. ऐसा काफी हद तक हुआ भी लेकिन तब तक चोटें शायद गहरी पहुँच चुकी थीं.

सपा संग्राम – ब्रेक डाउन

  1. सपा संग्राम ने पूरे उत्तर प्रदेश राज्य को थाम कर रख दिया था. उस समय भी समाजवादी पार्टी के कांग्रेस के साथ गठबंधन की खबरें तेज़ थीं.
  2. मुलायम सिंह यादव ने प्रशांत किशोर से भी उस दौरान मुलाकात की थी जिससे कांग्रेस और सपा के गठबंधन की खबरें तेज़ हुयीं थी.
  3. गठबंधन रूप नहीं ले पाया लेकिन राहुल ने अखिलेश यादव को ‘अच्छा बच्चा’ बता कर अखिलेश के लिए अपने विचार साफ़ कर दिए थे.

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सपा संग्राम के बाद अखिलेश यादव को टिकट वितरण में हक़ मिला था जो की अब तक उनके चाचा शिवपाल यादव के पास था.

अखिलेश साफ़ छवि के नेता होने की वजह से विवादित प्रत्याशियों को टिकट नहीं देना चाहते थे. चाचा शिवपाल की राय इस पर अखिलेश से थोड़ी अलग थी. दोनों ने अपनी पसंद के प्रत्याशियों की सूची नेताजी से साझा करी थी.

इसके बाद 28 दिसंबर 2016 को मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी के 325 प्रत्याशियों की सूची निकाली जिसके बाद ही सपा संग्राम 2 की शंखनाद हुई.

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दरअसल इस लिस्ट में अखिलेश यादव के काफी करीबियों के नाम साफ़ कर दिए गए थे. इसमें अखिलेश की लिस्ट से सिर्फ 65% लोग ही थे. अखिलेश यादव से जब इस पर टिप्पणी मांगी गयी तो उन्होंने कहा की वो नेताजी से बात करेंगे.

अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव की बातचीत के बाद खबर आई की अखिलेश ने अपने समर्थकों को अलग चुनाव चिन्ह के साथ चुनाव लड़ने को कहा है.

अखिलेश ने इसके बाद अपनी पसंद के 235 प्रत्याशियों की सूची मुलायम सिंह से बगावत करते हुए जारी करी. अखिलेश से बगावत की बू आते ही शिवपाल ने मुलायम के साथ बैठक करी जिसके पश्चात 68 उम्मीदवारों की सूची जारी हुयी.

अखिलेश यादव और रामगोपाल सपा से निष्कासित!

रामगोपाल यादव ने इस बीच अखिलेश यादव को खुला समर्थन दिया है और कहा की अखिलेश के खिलाफ जाने वाला उनके खिलाफ जायेगा. इसके साथ ही साथ रामगोपाल यादव ने सम्मलेन बुलाया जिसका हक़ सिर्फ राष्ट्रीय अध्यक्ष (यहाँ, मुलायम सिंह यादव) को होता है. उधर अखिलेश यादव के अपनी सूची निकालने पर उन्हें मुलायम सिंह यादव ने अनुशासनहीनता का नोटिस भेजा.

इसके परिणाम स्वरुप मुलायम सिंह ने 30 दिसम्बर की शाम प्रेस कांफ्रेंस बुला कर राम गोपाल यादव को और अखिलेश यादव को 6 साल के लिए सपा से निष्कासित किया.

अब क्या हो सकता?

अब चीजें नाज़ुक दिख रहीं हैं. मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री के चेहरे के सवाल को टालते हुए कहा की उसका फैसला हम करेंगे. ऐसे में कुछ गिनी हुयी चीज़ें हो सकती हैं. जैसे,

  1. अखिलेश यादव औपचारिक तौर पर मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे सकते हैं जिसके बाद,
    1. राज्य में राष्ट्रपति शासन लग सकता है या फिर,
    2. अखिलेश यादव को एक्टिंग मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है.
  2. अखिलेश यादव इस्तीफ़ा देकर कांग्रेस से हाथ जोड़ सकते हैं जिसके बाद अखिलेश और कांग्रेस समर्थक राज्य में बड़ी उलट फुलट कर सकते हैं. आपको बता दें की राहुल गाँधी ने अखिलेश को अच्छा बच्चा बताकर अपनी नियत साफ़ कर दी थी.

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