बार-बार इन्फेक्शन या कद-काठी में बदलाव: बच्चों में रेयर डिजीज पहचानने के ये हैं शुरुआती लक्षण

मैक्स अस्पताल की डॉ. प्रीति आनंद बताती हैं कि बच्चों में रेयर डिजीज के शुरुआती लक्षण सामान्य लग सकते हैं।
बच्चों की सेहत और उनके विकास को लेकर माता-पिता हमेशा सतर्क रहते हैं। हालांकि, मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, साकेत की सीनियर कंसल्टेंट (पीडियाट्रिक्स और इंटेंसिव केयर), डॉ. प्रीति आनंद बताती हैं कि बच्चों में कुछ दुर्लभ या आनुवांशिक बीमारियों के शुरुआती लक्षण बहुत ही सामान्य लग सकते हैं।
ये दुर्लभ रेयर डिजीज किसी एक स्पष्ट संकेत के बजाय, कई चिंताजनक लक्षणों के समूह के रूप में सामने आती हैं। इस आर्टिकल में ऐसे 8 ‘रेड फ्लैग्स’ दिए गए हैं, जिन्हें देखकर माता-पिता को तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए और डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
विकास में देरी होना या सीखी हुई चीजें भूल जाना
विकास में देरी: अगर आपका बच्चा अपनी उम्र के अन्य बच्चों की तुलना में बैठना, मुस्कुराना, आवाजें निकालना या चलना समय पर नहीं सीख पा रहा है।
सीखी हुई चीजें भूलना: अगर बच्चा पहले से सीखे हुए काम करना बंद कर दे (जैसे- बोलना बंद कर देना या चलने की क्षमता खो देना)। यह तंत्रिका तंत्र या मेटाबॉलिक बीमारियों का एक बहुत ही गंभीर संकेत हो सकता है।
दौरे पड़ना या शरीर की असामान्य हलचल
अगर बच्चे को बार-बार लगातार दौरे पड़ रहे हों, शरीर बहुत ज्यादा ढीला पड़ गया हो, उसके चलने के तरीके में अचानक बदलाव आ गया हो, या शरीर के अंगों में असामान्य हलचल दिखाई दे रही हो, तो इसे नजरअंदाज न करें।
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शारीरिक विकास का असामान्य तरीका
बच्चे के सिर का आकार बहुत छोटा या बहुत बड़ा होना, या फिर कद का छोटा रह जाना।
फेलियर टू थ्राइव: पर्याप्त और अच्छा पोषण मिलने के बावजूद बच्चे के वजन और लंबाई में वृद्धि न होना।
अत्यधिक वजन बढ़ना, जो किसी मेटाबॉलिक सिंड्रोम का संकेत हो सकता है।
चेहरे या शरीर की बनावट में असामान्यताएं
चेहरे की विशिष्ट बनावट (जैसे- आंखों के बीच ज्यादा दूरी होना, छोटा मुंह, बड़ी जीभ या पलकों का झपकने में समय लेना)।
हाथ-पैर की उंगलियों का ज्यादा होना या अंगों की लंबाई असामान्य होना।
चार्ज सिंड्रोम: कुछ सिंड्रोम एक साथ कई बीमारियों के रूप में सामने आते हैं; जैसे आंखों में दोष, दिल की बीमारी और कान की असामान्यताएं एक साथ होना। यह किसी दुर्लभ सिंड्रोम की जांच का स्पष्ट संकेत है।
बार-बार और गंभीर संक्रमण होना
अगर बच्चे को बार-बार गंभीर संक्रमण होते हैं (जैसे- बार-बार कान का इंफेक्शन, निमोनिया, सेप्सिस, या गहरे फंगल इन्फेक्शन) तो यह बच्चे की प्राथमिक रोग प्रतिरोधक क्षमता के कमजोर होने का संकेत हो सकता है।
शरीर के कई अंगों में एक साथ परेशानी होना
माता-पिता द्वारा बच्चे के पेट में कोई गांठ महसूस करना, त्वचा या आंखों का रंग पीला पड़ना।
बच्चे को दौड़ने या सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी होना, या छोटे शिशु को दूध पीते समय पसीना आना। ये लक्षण लिवर या हृदय रोगों की जांच की मांग करते हैं।
पैरों, चेहरे, पेट या आंखों पर लगातार बढ़ती हुई सूजन दिखाई देना।
मेडिकल टेस्ट और लैब रिपोर्ट का लगातार असामान्य आना
अगर बच्चे की लैब रिपोर्ट बार-बार असामान्य आ रही हो, तो यह चिंता का विषय है। उदाहरण के लिए, बिना किसी स्पष्ट कारण के बच्चे के हृदय की मांसपेशियों का बढ़ना या खून में कोशिकाओं की लगातार कमी होना, किसी मेटाबॉलिक या स्टोरेज बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं।
फैमिली हिस्ट्री
अगर भाई-बहनों या करीबी रिश्तेदारों में पहले से ही ऐसे लक्षण मौजूद हों, बचपन में अकारण मौतें हुई हों, बार-बार गर्भपात हुआ हो, या परिवार में कोई ज्ञात आनुवांशिक बीमारी हो।
अगर माता-पिता आपस में करीबी रिश्तेदार हैं और बच्चे में ऊपर दिए गए लक्षणों में से कोई भी संकेत दिखता है, तो किसी दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी होने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।
माता-पिता क्या करें?
डॉ. प्रीति आनंद के अनुसार, सबसे ज्यादा खतरे और चिंता की बात तब होती है, जब एक ही बच्चे में इनमें से कई लक्षण एक साथ दिखाई देते हैं (उदाहरण के लिए: विकास में देरी, दौरे पड़ना, चेहरे की असामान्य बनावट और शारीरिक विकास न होना)।
ऐसी स्थिति में बिल्कुल भी देर न करें। अपने बच्चे की तुरंत अपने बाल रोग विशेषज्ञ से जांच कराएं। वे स्थिति का मूल्यांकन करके आपको आगे के इलाज के लिए किसी ‘पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट’ या ‘जेनेटिक स्पेशलिस्ट’ के पास भेजेंगे।



