आईपीएस संजय कुमार बने भोपाल के नए पुलिस कमिश्नर

2004 बैच के आईपीएस संजय कुमार ने भोपाल के पुलिस कमिश्नर का पदभार संभाला। उन्होंने संगठित अपराधों की कमर तोड़ने, महिला अपराधों पर नियंत्रण और पुलिस की जवाबदेही बढ़ाने को प्राथमिकता बताया। मादक पदार्थों, अतिक्रमण और यातायात समस्याओं पर प्रशासन के साथ संयुक्त कार्रवाई का भी संकेत दिया।
राजधानी भोपाल की पुलिसिंग को नई दिशा देने वर्ष 2004 बैच के आईपीएस अधिकारी संजय कुमार ने पुलिस कमिश्नर का पदभार संभाल लिया है। सोमवार को पुलिस आयुक्त कार्यालय में निवर्तमान पुलिस आयुक्त हनिनारायणचारी मिश्रा ने उन्होंने पदभार संभाला। पदभार संभालने के बाद संजय कुमार ने कहा कि संगठित अपराधों की कमर तोड़ना, महिला अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और पुलिस को जनता के प्रति अधिक जवाबदेह बनाना उनकी शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। संगठित अपराध राजधानी के लिए बड़ी चुनौती है और ऐसे अपराधियों की रीढ़ तोड़ना उनका पहला और स्पष्ट लक्ष्य रहेगा।
संजय कुमार भोपाल के तीसरे पुलिस कमिश्नर हैं। संजय कुमार इससे पहले बालाघाट आई जी थे। भोपाल में यह उनका दूसरा कार्यकाल है। इससे पहले वे एसपी मुख्यालय के पद पर रहकर भी राजधानी की पुलिस व्यवस्था से जुड़े रह चुके हैं। पदभार संभालने के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं और कार्ययोजना की रूपरेखा साझा की। संजय कुमार ने कहा कि राजधानी में प्रभावी पुलिसिंग के लिए राजपत्रित पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करना जरूरी है। इसके लिए नवाचार किए जाएंगे, ताकि थानों तक जनता के प्रति जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय हो सके। उन्होंने महिला अपराधों को गंभीर चुनौती बताते हुए इनके चिन्हांकन और रोकथाम के लिए विशेष रणनीति बनाने की बात कही।
चुनौतियों से निपटना उनके लिए नया नहीं
पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने कहा कि कई कॉलोनियों में अतिक्रमण के कारण यातायात और कानून-व्यवस्था प्रभावित होती है, वहां प्रशासन के साथ मिलकर संयुक्त अभियान चलाए जाएंगे। इससे यातायात व्यवस्था को सुगम बनाया जा सकेगा। बालाघाट में अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी चुनौतियों से निपटना उनके लिए नया नहीं है। उन्होंने पुलिस प्रशिक्षण को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राजधानी जैसे बड़े शहर में अलग-अलग प्रकृति की समस्याओं के लिए अलग नीतियां बनानी पड़ती हैं। मादक पदार्थों के खिलाफ त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। प्रत्येक मामले की नियमित मॉनिटरिंग, बीट सिस्टम को सशक्त करना और निचले स्तर तक जिम्मेदारी तय करना उनकी कार्यशैली का अहम हिस्सा होगा।




