
पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में बुधवार को चतुर्द विग्रह की पवित्र बानाकलागी नीति (श्रीमुख श्रृंगार अनुष्ठान) के कारण श्रद्धालुओं के लिए सार्वजनिक दर्शन लगभग चार घंटे तक निलंबित रहेगा। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
मंदिर प्रशासन के अनुसार यह विशेष अनुष्ठान फाल्गुन कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि, बुधवार 11 फरवरी 2026 को संपन्न होगा। तय कार्यक्रम के मुताबिक दूसरे भोगमंडप भोग के समापन के बाद शाम करीब 6 बजे से रात 10 बजे तक मंदिर के सभी द्वार बंद रहेंगे और इस दौरान आम श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति नहीं होगी।
मंदिर की प्राचीन परंपरा के अनुसार बानाकलागी नीति एक अत्यंत गोपनीय और विशिष्ट अनुष्ठान है, जिसे केवल दत्ता महापात्र सेवक रत्न बेदी पर संपन्न करते हैं। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान सुदर्शन के पवित्र श्रीमुख को प्राकृतिक रंगों और सुगंधित द्रव्यों से सुशोभित किया जाता है।
श्रीमुख श्रृंगार के लिए हिंगुला (सिंदूरी लाल), हरिताला (पीला), शंख (सफेद) और काला रंग जैसी प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग किया जाता है। इसके साथ ही कस्तूरी और केसर जैसी सुगंधित वस्तुएं मिलाई जाती हैं। इन रंगों को देवताओं पर अर्पित करने से पूर्व परंपरागत विधि से कपूर और कस्तूरी के साथ तैयार किया जाता है।
अनुष्ठान पूर्ण होने के पश्चात महाप्रभु का महास्नान किया जाएगा। इसके बाद मंदिर के सभी द्वार पुनः खोल दिए जाएंगे और श्रद्धालुओं के लिए दर्शन सामान्य रूप से शुरू हो जाएंगे।
एसजेटीए अधिकारियों ने बताया कि बानाकलागी नीति लगभग महीने में दो बार आयोजित की जाती है और परंपरा के अनुसार यह अनुष्ठान केवल बुधवार को ही संपन्न होता है। इस दौरान मंदिर पूर्ण रूप से बंद रहता है और दर्शन सख्त रूप से वर्जित होता है।
मंदिर प्रशासन ने बुधवार को दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि वे इस व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए अपनी यात्रा की योजना बनाएं और प्रशासन का सहयोग करें।





