इस दिन होंगे महाराष्ट्र में राज्यसभा की सात सीटों के चुनाव

महाराष्ट्र में होने वाले राज्यसभा और विधान परिषद के चुनावों के लिए महाराष्ट्र के दो दिग्गज नेताओं को कांग्रेस के सहारे की जरूरत पड़ेगी। लेकिन इन दोनों की मदद करने के बावजूद स्वयं कांग्रेस के हाथ कुछ नहीं आएगा।
महाराष्ट्र में राज्यसभा की सात सीटों के चुनाव 16 मार्च को होने जा रहे हैं। इसमें से सिर्फ एक सीट विपक्षी गठबंधन के खाते में आनी है और उसके लिए ‘एक अनार तीन बीमार’ की स्थिति दिखाई दे रही है।
विपक्ष के हिस्से में आने वाली इस एक सीट के लिए इन दिनों प्रमुखता से राकांपा (शरदचंद्र पवार) का नाम चलाया जा रहा है। उनकी पुत्री एवं लोकसभा सदस्य सुप्रिया सुले उन्हें पुनः राज्यसभा भेजने के लिए कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व से बात कर रही हैं।
शिवसेना (यूबीटी) से भी उनकी बात चल रही है। शिवसेना (यूबीटी) के साथ उनका सौदा इसी वर्ष मई में होने जा रहे विधान परिषद चुनाव में उसके मुखिया उद्धव ठाकरे को पुनः राज्य के उच्च सदन में भेजने को लेकर हो सकता है।
विधान सभा में शिवसेना (यूबीटी) के पास 20 और राकांपा (शरदचंद्र पवार) के पास 10 सदस्य हैं। वहां एक सीट जीतने के लिए 28 से 29 सदस्यों की जरूरत पड़ेगी। उतनी सीटें यूबीटी और राकांपा (शरदचंद्र पवार) को मिलाकर हो जाएंगी।
लेकिन ये दोनों दल मिलकर भी विधान परिषद की एक सीट के लिए कांग्रेस की कोई मदद नहीं कर पाएंगे। न ही कांग्रेस अपने दम पर एक सीट जिताने में सक्षम होगी, क्योंकि विधानसभा में उसकी सदस्य संख्या सिर्फ 16 है।दूसरी ओर उससे पहले होने जा रहे राज्यसभा चुनाव में एक सीट जिताने के लिए प्रथम प्राथमिकता के 37 वोटों की जरूरत है।
इस चुनाव में विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी के पास कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और राकांपा (शरदचंद्र पवार) को मिलाकर कुल 46 वोट हैं। इस चुनाव में भी कांग्रेस को ही नि:स्वार्थ भाव से शरद पवार की मदद करने को कहा जा रहा है। लेकिन इस मदद के बदले उसे कुछ नहीं मिलने वाला, क्योंकि राज्यसभा का दूसरा उम्मीदवार जिताने की क्षमता महाविकास आघाड़ी के तीनों दलों में नहीं है।
यही बात महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्द्धन सपकाल को साल रही है, क्योंकि पहले राज्यसभा और फिर विधान परिषद चुनाव में उसके दोनों सहयोगी दल एक-एक सीट पा जाएंगे, लेकिन उसके हाथ कुछ नहीं लगने वाला।
उनकी एक और चिंता इस बात को लेकर भी है कि कांग्रेस की मदद से राज्यसभा में पहुंच जाने के बाद कहीं शरद पवार केंद्रीय राजनीति में राजग और राज्य की राजनीति में सत्तारूढ़ महागठबंधन महायुति की हिस्सा न बन जाएं, क्योंकि कथित तौर पर राकांपा नेता अजीत पवार की विमान दुर्घटना में मृत्यु के पहले से शुरू हुए राकांपा के दोनों गुटों के विलय की चर्चा पर अभी पूर्ण विराम नहीं लगा है।
यदि बदली परिस्थितियों में पवार परिवार विलय के बारे में सोचता है तो राज्य से लेकर केंद्र तक की राजनीति के समीकरण बदल जाएंगे। सपकाल इसलिए भी राज्यसभा चुनाव में शरद पवार की मदद करने से ठिठक रहे हैं।
महाराष्ट्र से राज्यसभा के सात सदस्य हो रहे सेवानिवृत्त
अप्रैल में महाराष्ट्र से राज्यसभा के सात सदस्य सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इनमें भाजपा के दो-डा. भागवत कराड और धैर्यशील पाटिल, राकांपा (शरदचंद्र पवार) के दो- शरद पवार और फौजिया खान, शिवसेना (यूबीटी) से एक प्रियंका चतुर्वेदी, कांग्रेस से एक रजनी पाटिल और आरपीआइ से एक रामदास आठवले शामिल हैं।
इस गणित के अनुसार वर्तमान में विपक्षी दलों के गठबंधन महाविकास आघाड़ी के खाते की चार सीटें खाली हो रही हैं और भाजपानीत महायुति के खाते की तीन।
फडणवीस को भरोसा, सत्तारूढ़ महायुति के छह सदस्य आसानी से चुने जा सकते हैं
मुख्यमंत्री फडणवीस ये भरोसा जता चुके हैं कि सत्तारूढ़ महायुति के छह सदस्य आसानी से चुने जा सकते हैं। इनमें चार सीटें भाजपा को और एक-एक सीट शिवसेना (शिंदे) और राकांपा (सुनेत्रा) को मिल सकती हैं। भाजपा अपने कोटे से एक सीट केंद्रीय राज्यमंत्री एवं रिपब्लिकन पार्टी के नेता रामदास आठवले को दे सकती है।
राकांपा की एक सीट अजीत पवार के पुत्र पार्थ पवार को मिल सकती है। माना जा रहा है कि पार्थ की मां सुनेत्रा पवार द्वारा खाली की गई राज्यसभा की सीट से पार्टी के किसी और सदस्य को उम्मीदवार बनाया जा सकता है।





