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ओडिशा पुलिस SI भर्ती घोटाला: CBI चार्जशीट ने खोली सिस्टम की पोल, 16 आरोपी नामजद

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने ओडिशा पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा घोटाले में 60 पन्नों की प्रारंभिक चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट ने परीक्षा संचालन में बड़े पैमाने पर की गई हेराफेरी और गंभीर प्रणालीगत विफलताओं को उजागर किया है। चार्जशीट में 16 आरोपियों के नाम हैं, जिसे 120 गवाहों के बयान और 171 साक्ष्यों का समर्थन प्राप्त है।

सीबीआइ के अनुसार, प्रश्नपत्रों की तैयारी और छपाई में गंभीर अनियमितताएं की गईं। लॉजिस्टिक सहायता के लिए नियुक्त थर्ड पार्टी एजेंसी सिलिकॉन टेकलैब प्राइवेट लिमिटेड ने कथित तौर पर अपने दायरे से बाहर जाकर काम किया। कंपनी के प्रबंध निदेशक सुरेश नायक पर प्रश्नपत्र प्रक्रिया में हेरफेर करने का आरोप है।

ओडिशा पुलिस भर्ती बोर्ड (ओपीआरबी) को प्रश्नपत्र तैयार करने और छपाई की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जबकि सिलिकॉन टेक को केवल सीसीटीवी स्थापना, मैनपावर तैनाती और वाहन व्यवस्था जैसे लॉजिस्टिक कार्य सौंपे गए थे। इसके बावजूद, सुरेश नायक के निर्देश पर कोलकाता स्थित सरस्वती प्रिंटिंग प्रेस में प्रश्नपत्रों की छपाई कराई गई।

कैसे शुरू हुआ घोटाले का खेल?
चार्जशीट में कहा गया है कि ओपीआरबी ने शुरुआत में केवल एक सेट प्रश्नपत्र छापने का निर्णय लिया था, लेकिन सुरेश नायक ने एक अतिरिक्त सेट छापने की सलाह दी। ओपीआरबी अधिकारियों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर वैकल्पिक सेट की छपाई की अनुमति दे दी।

इसी प्रक्रिया के दौरान सुरेश नायक ने कथित तौर पर वैकल्पिक सेट को मुख्य सेट से बदल दिया और उसकी छपाई करवा दी, जिससे हेराफेरी संभव हुई। छपे हुए प्रश्नपत्र बाद में कटक स्थित छठी बटालियन के स्ट्रॉन्ग रूम में रखे गए।

सीबीआइ ने ओपीआरबी की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं और पूछा है कि उसके अधिकारियों ने सील किए गए प्रश्नपत्र पैकेटों की जांच क्यों नहीं की। ओपीआरबी के पुलिस अधीक्षक बलभद्र दीप और सेक्शन ऑफिसर गौतम प्रसाद बेहेरा से पूछताछ की गई, लेकिन जांच एजेंसी को संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

जांच एजेंसी यह भी पड़ताल कर रही है कि प्रश्नपत्रों की छपाई कोलकाता में क्यों कराई गई और सिलिकॉन टेक को कई सेट छापने जैसे अहम फैसलों को प्रभावित करने की अनुमति कैसे दी गई। सीबीआइ यह जांच कर रही है कि क्या ओपीआरबी अधिकारी जानबूझकर लापरवाह थे या स्पष्ट चेतावनी संकेतों के बावजूद साजिश को पहचानने में विफल रहे।

घोटाले का मास्टरमाइंड शंकर प्रुस्टी ने किया खुलासा
सीबीआइ ने पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज के मालिक शंकर प्रुस्टी को इस घोटाले का मास्टरमाइंड बताया है। हालांकि टेंडर आईटीआई लिमिटेड के जरिए सिलिकॉन टेक को मिला था, लेकिन वास्तविक काम अवैध रूप से पंचसॉफ्ट को सब-कॉन्ट्रैक्ट पर दे दिया गया, जिसकी जानकारी अधिकारियों को नहीं थी।

प्रुस्टी पर आरोप है कि उसने परीक्षा से काफी पहले प्रश्नपत्र हासिल कर लिए और अरबिंद दास, मुना मोहंती, धर्मेंद्र प्रधान और त्रिनाथ जेना जैसे बिचौलियों के जरिए अभ्यर्थियों से सौदे किए। पुलिस एसआई के चयन के बदले प्रति उम्मीदवार 25 लाख रुपये की मांग की गई।

साजिश के तहत 114 उम्मीदवारों को आंध्र प्रदेश भेजा गया, जबकि कई अन्य को परीक्षा से पहले पश्चिम बंगाल के दीघा और मंदरमणि भेजने की व्यवस्था की गई। जांच में यह भी सामने आया कि भुगतान करने वाले उम्मीदवारों के मूल प्रमाणपत्र एकत्र किए गए थे।

प्रश्नपत्र लीक होने के कारण ही यह घोटाला संभव हो सका। यदि इसके लिए ओपीआरबी के अधिकारी जिम्मेदार थे, तो यह गंभीर सवाल उठता है कि प्रश्नपत्र आखिर लीक कैसे हुए। इस पहलू की निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए,” पूर्व डीएसपी शरत चंद्र साहू ने कहा।

16 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट
सीबीआइ ने इस मामले में शंकर प्रुस्टी, सुरेश नायक, मुना मोहंती, विश्वा रंजन बेहेरा, अरबिंद दास, प्रियदर्शिनी समल, सागर गौड़, बिरंची नायक, अर्जुन नायक और नितीश कुमार सहित कुल 16 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।

गवाहों में आरोपी उम्मीदवार और उनके परिजन, उम्मीदवारों को ले जाने वाले बस स्टाफ, पश्चिम बंगाल के होटलों के प्रबंधक व कर्मचारी, तथा भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी शामिल हैं।

हालांकि बिहार से गिरफ्तार किए गए अमित भारती के खिलाफ अभी तक चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है। सीबीआइ ने संकेत दिया है कि जांच आगे बढ़ने पर और लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।

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