
वाहन का प्रदूषण प्रमाणपत्र (पीयूसी) नहीं होने पर ईंधन नहीं दिए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने राज्य परिवहन आयुक्त से स्पष्टीकरण मांगा है। इसी तरह, पुराने जुर्माने का भुगतान नहीं करने पर प्रदूषण प्रमाणपत्र जारी नहीं करने संबंधी निर्देश पर भी भ्रम दूर करने को कहा गया है।
इस मामले में परिवहन आयुक्त को आगामी 2 सप्ताह के भीतर शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से भी इस पर स्पष्ट जवाब मांगा है।
परिवहन विभाग ने एक अधिसूचना जारी कर कहा है कि जिन वाहनों के पास प्रदूषण प्रमाणपत्र नहीं होगा, उन्हें ईंधन नहीं मिलेगा और प्रदूषण प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए सभी पुराने जुर्माने का भुगतान करना अनिवार्य होगा। इस अधिसूचना को चुनौती देते हुए भुवनेश्वर निवासी स्निग्धा पात्र ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है।
याचिका में उन्होंने उल्लेख किया है कि यदि कोई वाहन चालक निर्धारित समय के भीतर प्रदूषण प्रमाणपत्र नहीं बनवा पाता है, तो नियमों के अनुसार उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है। लेकिन ईंधन न देने का प्रावधान कानूनसम्मत नहीं है।
इसी तरह पुराने जुर्माने की वसूली के लिए किसी को बाध्य करना भी गैरकानूनी है, ऐसा याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया। इस प्रकार की कोई व्यवस्था न तो केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम में है और न ही राज्य परिवहन कानून में। इसलिए कानून का उल्लंघन कर मनमाने ढंग से कोई नियम लागू करना असंवैधानिक है।
इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने अपने आवेदन में इस नियम को रद्द करने की मांग की है। आज इस याचिका की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और परिवहन आयुक्त दोनों को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 2 सप्ताह बाद होगी।




