अध्यात्म

कब से शुरू हो रहे हैं माघ माह के गुप्त नवरात्र

माना गया है कि गुप्त नवरात्र के दौरान माता रानी की विधिवत पूजा-अर्चना से साधक के घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही उसे आरोग्य का आशीर्वाद भी मिलता है। यह नवरात्र तंत्र साधना करने वालों के लिए विशेष फलदायी मानी गई है।

इस दिन से शुरू होंगे गुप्त नवरात्र
माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 जनवरी को देर रात 1 बजकर 21 मिनट पर शुरू हो रही है। वहीं इस तिथि का समापन 20 जनवरी को देर रात 2 बजकर 14 मिनट पर होगा। ऐसे में माघ गुप्त नवरात्र की शुरुआत 19 जनवरी से होगी, जो 28 जनवरी तक चलने वाले हैं। गुप्त नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना का मुहूर्त कुछ इस प्रकार रहेगा –

घटस्थापना मुहूर्त – सुबह 7 बजकर 14 मिनट पर से सुबह 10 बजकर 46 मिनट तक
घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक

गुप्त नवरात्र का महत्व
माघ और आषाढ़ माह में पड़ने वाले नवरात्र को गुप्त नवरात्र के रूप में जाना जाता है। इस दौरान प्रकट नवरात्र की तरह ही शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तक, मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसा माना गया है कि गुप्त नवरात्र की अवधि में मां दुर्गा 10 महाविद्याओं के रूप में प्रकट हुई थीं। इसलिए इन दौरान दस महाविद्याओं की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। गुप्त नवरात्र की पूजा मुख्य रूप से अघोरी व तांत्रिकों द्वारा की जाती है। माना जाता है कि इस पूजा को जितने गुप्त रूप से किया जाए, साधक को उतना अधिक लाभ मिलता है।

गुप्त नवरात्र पूजा विधि
गुप्त नवरात्र के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
पूजा स्थल की सफाई करने के बाद देवी दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से घट स्थापना करें।
माता रानी को सिंदूर व गुड़हल के फूलों की माला अर्पित करें।
देवी को पंचामृत और नारियल आदि अर्पित करें और देसी घी का दीपक जलाएं।
अंत में देवी मां की आरती करें और सभी लोगों में प्रसाद बाटें।

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