‘क्रिकेट भी सहनशक्ति का खेल…’, Sunil Gavaskar ने अंपायरों को दी सख्ती बरतने की सलाह

नोवाक जोकोविक ने जानिक सिनर को हराकर ऑस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल में जगह बनाई, जहां उनका मुकाबला कार्लोस अलकराज से होगा। सुनील गावस्कर ने जोकोविक के जुझारूपन की सराहना की। इसके साथ ही, उन्होंने क्रिकेट में बारिश के कारण खेल रुकने, गीले आउटफील्ड और खिलाड़ियों को बार-बार पानी पिलाने जैसी प्रथाओं पर सवाल उठाए। गावस्कर ने फील्डरों द्वारा हथेलियों पर टेप लगाने की भी आलोचना की और खेल को अधिक सख्त बनाए रखने की वकालत की।
Sunil Gavaskar: मेलबर्न के राड लेवर एरिना की घड़ी जब रात के दो बजने की ओर बढ़ रही थी, तभी जानिक सिनर का बैकहैंड ट्रामलाइन के बाहर चला गया और इसके साथ ही नोवाक जोकोविक ने पुरुष सिंगल्स के फाइनल में जगह बनाते हुए अपने करियर की सबसे शानदार जीतों में से एक दर्ज की। जोकोविक अब 25वां ग्रैंड स्लैम जीतने की दहलीज पर खड़े हैं। फाइनल में उनके सामने कार्लोस अलकराज की चुनौती होगी, जो विंबलडन में उन्हें सीधे सेटों में हरा चुके हैं।
ऐसे में सवाल यही है कि सिनर के खिलाफ मैराथन मुकाबले के बाद क्या जोकोविक के पास एक और यादगार जीत दर्ज करने की ऊर्जा बची होगी? इसमें कोई शक नहीं कि अलकराज और सिनर इस समय अलग स्तर पर हैं और उन्हें हराने के लिए असाधारण प्रयास की जरूरत होती है।
लेकिन सेमीफाइनल में सिनर के खिलाफ हर एक अंक के लिए जिस तरह उन्होंने संघर्ष किया, वह दिखाता है कि महान खिलाड़ी कभी हार नहीं मानते। यह तथ्य भी बहुत कुछ कहता है कि खेल जगत के कई दिग्गज रात दो बजे तक इन दो योद्धाओं की जंग देखने के लिए डटे रहे। दिलचस्प बात यह भी रही कि मैच किसी तय समय-सीमा में बंधा नहीं था।
अंपायर को सख्ती बरतने की सलाह
शायद क्रिकेट, खासकर टेस्ट क्रिकेट, यहां से कुछ सीख सकता है। कई बार होता है कि हल्की बूंदाबांदी के कारण खेल शुरू नहीं हो पाता, जबकि जब खेल चल रहा होता है और हल्की फुहार पड़ती है तब अंपायर तुरंत खिलाड़ियों को मैदान से बाहर नहीं बुलाते। अगर ऐसा है, तो फिर सिर्फ कुछ बूंदों के कारण खेल दोबारा शुरू न होना कितना जायज है?
आउटफील्ड के गीले होने का बहाना भी अक्सर दिया जाता है, जबकि डे-नाइट क्रिकेट में ओस के कारण मैदान कई बार पूरी तरह भीगा होता है और फिर भी खेल जारी रहता है। सच तो यह है कि अगर किसी मैदान पर पूरे आउटफील्ड को ढकने की व्यवस्था नहीं है, तो वहां अंतरराष्ट्रीय मुकाबले नहीं होने चाहिए। दर्शक और खासकर ब्रॉडकास्टर, यह हक रखते हैं कि खेल जल्द से जल्द शुरू हो या जारी रहे, न कि तब तक रुके जब तक हालात पूरी तरह आदर्श न हो जाएं।क्रिकेट भी सहनशक्ति का खेल है, इसलिए अंपायरों को इस बात पर सख्ती दिखानी चाहिए कि मैदान पर ड्रिंक्स कब लाई जाएं।
पहले ड्रिंक्स सिर्फ तय ब्रेक पर आती थीं, लेकिन 12वां खिलाड़ी हर समय पानी की बोतलें लेकर मैदान में घूमता रहता है। तेज गेंदबाज एक ओवर पूरी ताकत से डालने के बाद बाउंड्री पर जाते हैं और वहां उन्हें स्टैमिना ड्रिंक व हल्की मालिश मिल जाती है।
सवाल यह है कि फिर सहनशक्ति का मतलब क्या रह गया? बल्लेबाजों को तो हर ओवर के बाद पानी नहीं मिलता, फिर गेंदबाजों को क्यों? अगर अधिकारी एक बार नजरअंदाज करें, तो यही चीजें धीरे-धीरे नियम बन जाती हैं।आजकल कई फील्डर हथेलियों पर टेप लगाए नजर आते हैं। यह कैसे मंजूर किया जा सकता है? अगर किसी खिलाड़ी की अंगुलियों के बीच की त्वचा फटी हो, तो सुरक्षा के लिए वहां टेप लगाया जा सकता है, लेकिन पूरी हथेली पर नहीं।
कैचिंग एरिया खुला होना चाहिए, वरना फिर फील्डरों को अंदरूनी दस्ताने पहनकर खेलने की इजाजत भी दे देनी चाहिए। यह खेल सख्त गेंद और सख्त खिलाडि़यों का है, इसे अनावश्यक रूप से नरम मत बनाइए। जैसे बल्लेबाजों के मैदान में उतरने से पहले बल्ले उनके बल्ले की जांच होती है, वैसे ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि फील्डरों की हथेलियों पर टेप न हो। 12वें खिलाड़ी को आधिकारिक ड्रिंक्स ब्रेक से पहले मैदान पर पानी पहुंचाने से रोका जाना चाहिए। यह खेल सख्त बल्ले और गेंद से सख्त खिलाड़ियों द्वारा खेला जाता है। कृपया इसे वैसा ही रहने दें, वरना आने वाले समय में मैदान पर ‘साफ्टी’ खिलाड़ियों की संख्या बढ़ती ही जाएगी।




