
राजस्थान सरकार द्वारा पारित विधि विरुद्ध धर्मांतरण प्रतिषेध अधिनियम, 2025 के कथित संविधान विरोधी और नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले प्रावधानों के खिलाफ सोमवार, 5 जनवरी को जयपुर में एक विशाल, शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक जन-आंदोलन आयोजित किया जाएगा। यह आंदोलन विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, मानवाधिकार और नागरिक संगठनों के संयुक्त सामाजिक मंच के आह्वान पर हो रहा है।
जयपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने कहा कि यह कानून संविधान के मूल ढांचे के विरुद्ध है और धार्मिक स्वतंत्रता, समानता का अधिकार, निजता का अधिकार तथा नागरिक स्वतंत्रताओं पर सीधा हमला करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कानून में प्रयुक्त अस्पष्ट शब्दावली, कठोर दंडात्मक प्रावधान, प्रशासन को दिए गए अत्यधिक अधिकार और न्यायिक निगरानी के अभाव में की जाने वाली कार्रवाइयों की संभावनाएं इसे अत्यंत खतरनाक बनाती हैं, जिससे दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है।
संयुक्त सामाजिक मंच के अनुसार, यह अधिनियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21, 25, 26, 27, 28 और 300ए का उल्लंघन करता है। वक्ताओं ने कहा कि यह कानून नागरिकों की अंतरात्मा, विश्वास और व्यक्तिगत स्वतंत्रता में अनुचित हस्तक्षेप करता है और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। आंदोलन का यह विरोध किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से किया जा रहा है। आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, अहिंसक और संवैधानिक दायरे में रहेगा।
आयोजकों ने बताया कि 5 जनवरी को रैली शहीद स्मारक से प्रारंभ होकर एमआई रोड, जीपीओ चौराहा, जालूपुरा और संसार चंद्र रोड होते हुए पुनः शहीद स्मारक पर समाप्त होगी। रैली के समापन पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। इस जन-आंदोलन में राजस्थान के विभिन्न जिलों से सामाजिक संगठनों, युवाओं, महिलाओं और बुद्धिजीवियों की सक्रिय भागीदारी रहने की उम्मीद है।
प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि इस प्रकार के कानूनों को बिना व्यापक सामाजिक संवाद और संवैधानिक समीक्षा के लागू किया जाता रहा, तो यह न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करेगा, बल्कि सामाजिक सौहार्द के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है। संयुक्त मंच ने सभी लोकतंत्र-प्रेमी नागरिकों से अपील की है कि वे इस शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल होकर संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी आवाज बुलंद करें।




