जीवनशैली

जलवायु परिवर्तन से बेकाबू हो रहे पानी में फैलने वाले बैक्टीरिया

सोचिए, अगर बीमारियों के खिलाफ दशकों से लड़ी जा रही हमारी जंग अचानक हार में बदलने लगे तो क्या होगा? जलवायु परिवर्तन सिर्फ बढ़ते तापमान का खेल नहीं है, इसकी वजह से बार-बार आ रहीं चरम मौसम की घटनाएं पानी से फैलने वाली बीमारियों को रोकने के लिए दुनिया भर में की गई दशकों की मेहनत और प्रगति पर पानी फेर रही हैं। रोगजनकों को पनपने का नया माहौल मिल रहा है, जिससे संक्रामक बीमारियों पर काबू पाना अब पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है।

5 साल से कम उम्र के बच्चों पर सबसे बड़ा खतरा
पानी से होने वाली बीमारियां हमेशा से ही सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती रही हैं। आंकड़े बताते हैं कि:

ये बीमारियां खासतौर पर कम और मध्यम आय वाले देशों में अधिक तबाही मचाती हैं।
5 साल से कम उम्र के बच्चों में होने वाली मौतों का यह एक बेहद बड़ा और गंभीर कारण हैं।

हर पैथोजन पर एक जैसा असर नहीं
जलवायु परिवर्तन और बीमारी फैलाने वाले सूक्ष्मजीवों का रिश्ता काफी पेचीदा है। शोध से पता चला है कि जलवायु परिवर्तन सभी रोगजनकों पर एक जैसा असर नहीं डालता।

यह उन पर्यावरणीय स्थितियों को बदल रहा है, जिनसे यह तय होता है कि:

पैथोजन वातावरण में जीवित रह पाएंगे या नहीं,
वे कितनी तेजी से और कहां तक फैलेंगे,
और क्या वे नए होस्ट को संक्रमित करने में सक्षम होंगे।

क्या कहती है अमेरिकी यूनिवर्सिटीज की रिसर्च?
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो एंशुट्ज और यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन के शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया में जल जनित बीमारियों के प्रसार के पैटर्न को बदल रहा है।

अध्ययनकर्ता एलिजाबेथ कार्लटन कहते हैं, “हम चाहते हैं कि लोग इस बात को समझें कि जलवायु परिवर्तन उन स्थितियों में बदलाव कर रहा है जो पैथोजन को फैलने में मदद करती हैं। यह उनके पनपने के अनुकूल माहौल तैयार कर रहा है, जिससे दुनिया की सबसे खतरनाक संक्रामक बीमारियों को नियंत्रित करना बेहद मुश्किल होता जा रहा है।”

अब पैथोजन के हिसाब से बनानी होगी रणनीति
चूंकि बैक्टीरिया, वायरस और पैरासाइट बदलते पर्यावरणीय हालातों पर अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया देते हैं, इसलिए इनसे निपटने का पुराना तरीका अब काम नहीं आएगा। शोधकर्ताओं का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में बीमारियों पर नियंत्रण पाने के लिए अब पैथोजन के हिसाब से ही नीतियां और रणनीतियां बनानी होंगी।

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