उत्तरप्रदेशराज्य

जेएस यूनिवर्सिटी के छात्र परेशान न हों..डिप्टी रजिस्ट्रार का आया पहला बयान

फर्जी डिग्री मामले में यूपी कैबिनेट द्वारा जेएस यूनिवर्सिटी की मान्यता समाप्त किए जाने के निर्णय के बाद कैंपस में अफरा-तफरी है। यहां पढ़ रहे हजारों छात्र और उनके अभिभावक भविष्य को लेकर गहरे संकट में हैं।

शुक्रवार को लगभग 700 परीक्षार्थियों ने जंतु विज्ञान एवं वनस्पति विज्ञान की परीक्षा दी, लेकिन उनके चेहरों पर भविष्य को लेकर डर साफ दिखाई दिया। इधर, आगरा स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि के रजिस्ट्रार अजय मिश्रा का कहना है कि शासन की ओर से उनको अभी तक कोई भी आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। आदेश आने पर ही पता लगेगा कि विवि को क्या-क्या करना है। आदेश प्राप्त होने के बाद ही प्राप्त जेएस विवि से दस्तावेज लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

शासन के आदेश पर निगाहें
अब सभी की निगाहें शासन की ओर से जारी होने वाली विस्तृत गाइडलाइन पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि इन हजारों विद्यार्थियों का शैक्षणिक सत्र कैसे सुरक्षित किया जाएगा।

जांच का घेरा और अब तक की कार्रवाई
यह पूरा मामला राजस्थान एसओजी की जांच के बाद गरमाया है। पीटीआई भर्ती के दौरान बीपीएड की अधिकांश डिग्रियां फर्जी पाई गई थीं। इस मामले में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और तत्कालीन रजिस्ट्रार पहले ही जेल जा चुके हैं।

जेएस विवि का पक्ष
जेएस यूनिवर्सिटी के डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ. यतेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि यूनिवर्सिटी को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। हम हर जांच में सहयोग करेंगे और बच्चों के भविष्य के साथ कोई लापरवाही नहीं बरती जाएगी। डॉ. बीआर आंबेडकर विवि के रजिस्ट्रार अजय मिश्रा ने बताया कि शासन से जो भी निर्देश प्राप्त होंगे, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। हमारे लिए छात्रों के हित सर्वोपरि हैं।

छात्रों की आवाज
छात्रा शिवानी का कहना है कि कैबिनेट को निर्णय लेने से पहले बच्चों के भविष्य का सोचना चाहिए था। अब हमारे सवालों के जवाब किसी के पास नहीं है। छात्र आदित्यराय ने कहा कि मान्यता समाप्त होने के बाद से हमारे अभिभावक बहुत चिंतित हैं। लाखों रुपये खर्च करने के बाद अब करियर दांव पर लग गया है।

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