झारखंडराज्य

झारखंड: सीएम हेमंत सोरेन को व्यक्तिगत पेशी से छूट की याचिका खारिज

झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन को एक मुश्किल से राहत मिलती है तो दूसरी अपने आप आ जाती है। हेमंत सोरेन का झारखंड में यह दूसरा कार्यकाल है। पहले जिस मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई थी और बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी, उस मामले में ईडी की विशेष अदालत से बड़ा झटका लगा है। हेमंत ने इस मामले में व्यक्तिगत पेशी से छूट की अपील की थी। अदालत ने उसे खारिज कर दिया है। हेमंत सोरेन झारखंड के मुख्यमंत्री के अलावा झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के अध्यक्ष भी हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मामलों की विशेष अदालत (पीएमएलए कोर्ट) से व्यक्तिगत पेशी में स्थायी छूट की याचिका खारिज हो जाने के बाद अब उन्हें हर सुनवाई में अदालत में खुद उपस्थित होना पड़ेगा। इस फैसले के बाद उनकी न्यायिक हिरासत और जमानत प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।

क्या है पूरा मामला

यह मामला रांची के बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण और खरीद-फरोख्त से जुड़ा है। ईडी ने आरोप लगाया है कि यह जमीन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खरीदी गई थी और यह गैर मजुरवा (भुईंहरी) प्रकृति की है। भूईहरी जमीन को न खरीदा जा सकता है और न कोई इसे बेच सकता है। ईडी का दावा है कि इस जमीन पर हेमंत सोरेन का अवैध कब्जा था। इसी मामले में लंबी पूछताछ के बाद उन्हें 31 जनवरी 2024 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के ठीक बाद ईडी ने गिरफ्तार कर लिया था। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान उन्हें जेल में रहना पड़ा। उनकी जगह पत्नी कल्पना ससोरेन ने लोकसभा चुनाव की कमान संभाली थी। सीएम का पद चंपई सोरेन को पार्टी ने सौंपा था। कल्पना की मेहनत का कमाल था कि इंडिया ब्लाक की पार्टियों को पांच सीटें हासिल हुईं।

BJP में खुशी छाई

हेमंत सोरेन ने भाजपा को अपदस्थ कर चूंकि दूसरी बार सीएम की कुर्सी संबाली है, इसलिए एनडीए उन्हें हरदम निसाने पर रखता है। अदालत द्वारा हेमंत सोरेन की व्यक्तिगत पेशी से छूट की याचिका खारिज किए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी खेमे में खुशी देखी जा रही है। भाजपा नेताओं ने इसे ‘कानून की जीत’ बताया है। उनका तर्क है कि अदालत के इस कड़े रुख से यह साबित होता है कि सोरेन ने गंभीर अपराध किए हैं और उन्हें किसी भी प्रकार की विशेष छूट का अधिकार नहीं है। भाजपा ने लगातार यह आरोप लगाया है कि सोरेन परिवार ने राज्य की खनिज संपदा और जमीन का दुरुपयोग किया है।

इसी मामले में जेल

हेमंत सोरेन इसी जमीन घोटाले से जुड़े मामले में करीब पांच महीने जेल में जेल में रहे। गिरफ्तारी के बाद से ही उन्हें रांची की बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार (जेल) में रखा गया। बाद में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से उन्हें जमानत मिल गई थी। जमानत पर रिहा होते ही उन्होंने चंपई सोरेन को हटा कर सीएम की कुर्सी संभाल ली थी। चूंकि विधानसभा चुनाव सिर पर था, इसलिए हेमंत सोरेन ने जेल से रिहा होते ही कई ऐसी योजनाओं का ऐलान किया, जिनसे उन्हें सत्ता में दोबारा आने का अवसर जनता ने दे दिया था। महिलाओं के लिए उनकी मइयां सम्मान योजना का चुनाव परिणाम को प्रभावित करने में सर्वाधिक असर रहा।

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