
हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में सुगाबथान डैम निर्माण की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि डैम निर्माण के मामले में वह हस्तक्षेप नहीं करेगा और न ही सरकार को निर्माण का आदेश देगा।
अदालत ने कहा कि यह सरकार का नीतिगत मामला है कि कहां डैम बनना चाहिए और कहां नहीं। इसके बाद प्रार्थी सांसद निशिकांत दुबे ने जनहित याचिका वापस ले ली। निशिकांत दुबे ने गोड्डा में सुगाबथान डैम बनाने के लिए जनहित याचिका दायर की थी।
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रार्थी ने पूर्व में भी बिहार के चानन डैम से सिंचाई के लिए झारखंड के गोड्डा को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने को लेकर भी जनहित याचिका दाखिल की थी।
जिसमें उन्होंने कोर्ट के समक्ष यह बात लाई थी कि वर्ष 1972 में गोड्डा में सुगाबथान डैम बनाने का सरकार का प्रस्ताव था। जिसमें कहा गया था कि भविष्य में अगर चानन डैम से झारखंड को पानी नहीं मिलता है तो गोड्डा में सुगाबथान डैम बनाया जाए। इ
सके लिए जमीन भी चिह्नित की गई थी। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि हाई कोर्ट ने निशिकांत दुबे के उक्त जनहित याचिका पर कोई दिशा निर्देश नहीं दिया था।
ऐसे में इस जनहित याचिका को खारिज किया जाए। प्रार्थी की ओर से कोर्ट को बताया कि सुगाबथान डैम बनने से गोड्डा के लोगों को सिंचाई की सुविधा मिलेगी।



