
दिल्ली की हवा की गुणवत्ता में कोई खास सुधार नजर नहीं आ रहा है। मौसमी दशाओं के प्रतिकूल रहने के कारण हवा की गुणवत्ता लगातार ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बनी हुई है। बुधवार की सुबह राजधानी दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 321 दर्ज किया गया, जो चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है।
राजधानी में नए साल पर भी लोगों को जहरीली फिजा से राहत नहीं मिली। ऐसे में मौसमी दशा खराब होने के चलते हवा बेहद खराब श्रेणी में बरकरार रही। गुरुवार के बाद शुक्रवार को भी दिल्ली की हवा बेहद खराब श्रेणी में दर्ज की गई। एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम फॉर दिल्ली के अनुसार, शुक्रवार सुबह राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 321 दर्ज किया गया है। यह हवा की बेहद खराब श्रेणी है। सुबह की शुरुआत धुंध और कोहरे की मोटी परत से हुई। इसके चलते कई इलाकों में दृश्यता भी बेहद कम रही। साथ ही, लोगों को आंख में जलन व सांस के मरीजों को परेशानी महसूस हुई।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) आंकड़ों के अनुसार, राजधानी दिल्ली के अलीपुर में एक्यूआई 292, आनंद विहार में एक्यूआई 348, अशोक विहार में 316, आया नगर में 235, बवाना में 227, बुराड़ी में 257, चांदनी चौक इलाके में 340 एक्यूआई दर्ज किया गया है।
वहीं, डीटीयू में 286, द्वारका सेक्टर 8 इलाके में 303, आईजीआई एयरपोर्ट टी3 इलाके में 219, आईटीओ में 292, जहांगीरपुरी में 318, लोधी रोड 284, मुंडका 324, नजफगढ़ में 254, नरेला में 292, पंजाबी बाग में 308, आरकेपुरम 319, रोहिणी 315, सोनिया विहार 306, विवेक विहार 330 में 436 दर्ज किया गया है।
इसलिए बिगड़ रही हवा
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बनी हुई गंभीर वायु गुणवत्ता का मुख्य कारण मौसम का मिजाज है। तापमान में कमी के कारण प्रदूषण के स्तर में भारी वृद्धि हुई है और पश्चिमी विक्षोभ के चलते वायु गुणवत्ता जो नीचे फंसी हुई ठंडी हवा को ऊपर उठने नहीं देती है। इसी ठंडी हवा में गाड़ियों का धुआं और निर्माण की धूल जैसे प्रदूषक जमा हो जाते हैं। प्रदूषकों को ऊपर जाने का रास्ता नहीं मिलता, इसलिए वे जमीन के बहुत करीब फंसे रहते हैं। साथ ही, जब बारिश नहीं होती और हवा भी धीरे चलती है, तो यह फंसा हुआ प्रदूषण बाहर नहीं निकल पाता, जिससे स्थिति कई गुना खराब हो जाती है।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है। 101-200 का मतलब वायु प्रदूषण का स्तर मध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब और 301 से 400 के बीच का अर्थ वायु गुणवत्ता की बेहद खराब श्रेणी को दर्शाता है। 401 से 500 की श्रेणी में वायु की गुणवत्ता गंभीर बन जाती है। ऐसी स्थिति में इंसान की सेहत को नुकसान पहुंचता है। पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह जानलेवा है।





