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दिल्ली विधानसभा: जल व्यवस्था में सुधार का ब्लू प्रिंट, पूंजीगत खर्च बढ़ाया; मेट्रो को मिलेगी अतिरिक्त मुद्रा

विधानसभा के शीतकालीन सत्र में जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने दिल्ली की जल व्यवस्था सुधार का विस्तृत ब्लू प्रिंट पेश किया। उन्होंने कहा कि हर घर तक साफ, समान और चौबीस घंटे पानी पहुंचाने के लिए सरकार ने 11 महीनों में 7,212 करोड़ रुपये के 94 बड़े जल और सीवरेज प्रोजेक्ट मंजूर कर काम शुरू कर दिया है।

जल मंत्री ने सदन को बताया कि दिल्ली में कुल 16,000 किलोमीटर लंबा जल पाइपलाइन नेटवर्क है, जिसमें से 5,200 किलोमीटर से अधिक पाइपलाइन 30 साल से ज्यादा पुरानी हैं। 2,700 किलोमीटर 20 से 30 साल पुरानी हैं। इन पुरानी लाइनों के कारण लीकेज, पाइप फटना, दूषित पानी और 55 फीसदी तक नॉन-रेवेन्यू वाटर की बर्बादी हो रही है। उन्होंने कहा कि यह समस्या एक दिन की नहीं, बल्कि पुरानी सरकारों की वर्षों की अनदेखी का नतीजा है।

अटके रहे प्रोजेक्ट, बढ़ती गई लागत
मंत्री ने चंद्रावल और वजीराबाद जल सुधार परियोजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ये दोनों प्रोजेक्ट 2011 से प्रस्तावित थे, लेकिन पिछली सरकारों की निर्णय लेने की अक्षमता, बार-बार टेंडर रद्द करने और फंडिंग एजेंसियों से टकराव के कारण बरसों तक लटके रहे। चंद्रावल कमांड एरिया प्रोजेक्ट 96 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और 22 लाख आबादी को कवर करता है। 2020 में टेंडर रद्द हुआ, 2021 में फाइनेंशियल बिड खुलने के बावजूद काम नहीं मिला। वहीं वजीराबाद प्रोजेक्ट, जो 123 वर्ग किलोमीटर और 30 लाख आबादी को सेवा देता है, उसकी लागत 2,243 करोड़ से बढ़कर 3,715 करोड़ हो गई और अक्तूबर 2020 में एडीबी ने फंडिंग वापस ले ली, जिससे प्रोजेक्ट पूरी तरह ठप हो गया।

रुकी परियोजना को दोबारा शुरू किया
जल मंत्री ने बताया कि मौजूदा सरकार ने सत्ता में आते ही लंबित योजनाओं को प्राथमिकता दी है। चंद्रावल प्रोजेक्ट के शेष पैकेज नवंबर 2025 में आवंटित किए जिसकी कुल लागत 2,406 करोड़ है। इसमें 1,044 किलोमीटर नई पाइपलाइन और 21 अंडरग्राउंड रिजर्वॉयर बनने हैं। इससे 9 विधानसभा क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा। वजीराबाद प्रोजेक्ट को एडीबी की मदद से दोबारा शुरू किया गया है। इस योजना के तहत 1,697 किलोमीटर नई पाइपलाइन और 14 यूजीआर बनाए जाएंगे, जिससे 11 विधानसभा क्षेत्रों में चौबीस घंटे पानी की सप्लाई होगी।

पूरी दिल्ली के लिए मास्टर प्लान
सरकार ने शेष दिल्ली को छह जोन में बांटकर नए डीपीआर और नए कंसल्टेंट की प्रक्रिया शुरू की है। अगले दो-तीन साल में करीब 7,000 किलोमीटर पुरानी पाइपलाइन बदली जाएंगी, 54 नए यूजीआर और 1,340 डीएमए बनाए जाएंगे। लक्ष्य है कि पूरे शहर में चौबीस घंटे जल आपूर्ति और नॉन-रेवेन्यू वाटर को 15 फीसदी तक लाया जाए। मंत्री ने कहा कि हाल ही में 262 नए ट्यूबवेल चालू किए गए हैं, जिससे करीब 90 लाख गैलन अतिरिक्त पानी मिल रहा है। 200 किलोमीटर नई पाइपलाइन डाली जा चुकी है। कई अनधिकृत कॉलोनियों में पहली बार नियमित जल आपूर्ति शुरू हुई है। पल्ला, बिजवासन और सिरसपुर में नए यूजीआर चालू कर आसपास के इलाकों को फायदा पहुंचाया गया है।

सीवर नेटवर्क से हर घर जुड़ने तक सेप्टिक टैंक की सफाई मुफ्त
दिल्ली में दशकों से साफ नहीं हुए ट्रंक सीवरों की सफाई के लिए 170 करोड़ की लागत से 100 किलोमीटर ट्रंक सीवर की डी-सिल्टिंग शुरू की गई है। 506 सीवर सफाई मशीनें, जिनमें सुपर सकर और जेटिंग मशीनें शामिल हैं, तैनात की गई हैं। जल मंत्री ने बड़ी घोषणा की कि जब तक हर घर सीवर नेटवर्क से नहीं जुड़ता, तब तक सेप्टिक टैंक की सफाई पूरी तरह मुफ्त होगी। इसके लिए 300 नए सरकारी टैंकर तैनात किए जाएंगे।

सरकार अतिरिक्त पानी बढ़ाएगी
सरकार हिमाचल प्रदेश से 11.3 करोड़ गैलन अतिरिक्त पानी, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से 51 क्यूसेक पानी के लिए बातचीत कर रही है। मुनक नहर और डीएसबी कैनाल की लाइनिंग से पानी की बर्बादी कम की जा रही है। आईआईटी रुड़की से कंड्यूट पाइपलाइन पर स्टडी कराई जा रही है। द्वारका वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता भी 20 एमजीडी बढ़ाई जा रही है।

पूंजीगत खर्च बढ़ाया, मेट्रो को 2,117 करोड़ अतिरिक्त, बिजली सब्सिडी 4,000 करोड़ पहुंची
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विधानसभा में एक लाख करोड़ रुपये का रिवाइज्ड बजट रखते हुए पूंजीगत खर्च में बड़ी बढ़ोतरी की है। मेट्रो विस्तार के लिए अतिरिक्त 2,117 करोड़ रुपये और बिजली सब्सिडी को 4,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाने का ऐलान किया। सरकार का कहना है कि यह बजट दिल्ली की बुनियादी संरचना को मजबूत करने और आम लोगों को सीधी राहत देने की दिशा में अहम कदम है।

संशोधित बजट की सबसे अहम बात पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) में इजाफा है। सरकार ने कैपिटल बजट को 28,115 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 30,247 करोड़ रुपये कर दिया है। इसका सीधा असर सड़क, पुल, स्कूल, अस्पताल, परिवहन और दूसरी स्थायी संपत्तियों के निर्माण पर पड़ेगा। सरकार का मानना है कि पूंजीगत खर्च बढ़ने से रोजगार भी पैदा होंगे और विकास कार्यों की रफ्तार तेज होगी। वहीं स्थापना बजट में भी मामूली बढ़ोतरी की गई है, जो अब 42,150 करोड़ रुपये हो गया है। सरकार का दावा है कि राजस्व खर्च को संतुलित रखते हुए निवेश पर ज्यादा ध्यान दिया गया है।

मेट्रो विस्तार के लिए खोला खजाना
दिल्ली मेट्रो के लिए इस संशोधित बजट में सरकार ने खजाना खोल दिया है। अतिरिक्त राशि जारी करने से मेट्रो को कुल आवंटन 5,046.66 करोड़ रुपये हो गया है। इस रकम से मेट्रो के नए फेज, विस्तार परियोजनाओं और लंबित कामों को गति मिलेगी। सरकार का कहना है कि मेट्रो न सिर्फ दिल्ली की लाइफलाइन है, बल्कि प्रदूषण और ट्रैफिक जाम से निपटने का सबसे मजबूत साधन भी है।

बस सेवा और डीटीसी पर भी ध्यान
सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के बजट में 653 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है। डीटीसी का कुल बजट 3,433 करोड़ रुपये हो गया है। इससे बसों के संचालन, रखरखाव और यात्रियों की सुविधाओं में सुधार की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा लोग निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें।

सड़कों और अधूरे प्रोजेक्ट पर खर्च
संशोधित बजट में सड़कों की सूरत बदलने के लिए 496 करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए गए हैं। लंबे समय से लटके बारापुला फेज-3 प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से जुड़ी पुरानी देनदारियों को चुकाने के लिए 500 करोड़ रुपये रखे गए हैं। सरकार का कहना है कि बेहतर सड़क नेटवर्क से ट्रैफिक जाम कम होगा और प्रदूषण पर भी असर पड़ेगा।

बिजली सब्सिडी जारी, आम लोगों को राहत
दिल्ली के लाखों परिवारों के लिए बिजली सब्सिडी जारी रहेगी। सरकार ने डिस्कॉम के जरिए दी जाने वाली बिजली सब्सिडी के लिए 400 करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए हैं। इसके बाद बिजली सब्सिडी का कुल बजट 4,000 करोड़ रुपये हो गया है। सरकार का कहना है कि इससे मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर महंगाई का बोझ कम होगा।

शिक्षा में सरकार बढ़ा रही निवेश
संशोधित बजट में शिक्षा का हिस्सा बढ़ाकर 21 फीसदी कर दिया गया है, जो कुल 20,702 करोड़ रुपये होता है। यूनिवर्सिटी के लिए जमीन और फ्लैट खरीदने के बजट को 500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,362 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा शिक्षा के अधिकार कानून के तहत ट्यूशन फीस से जुड़ी लंबित देनदारियों को चुकाने के लिए 140 करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि शिक्षा पर खर्च भविष्य में बेहतर नतीजे देगा।

अनधिकृत कॉलोनियों और नगर निगम को राहत
अनधिकृत कॉलोनियों के विकास के लिए बजट को 502 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 630 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इससे इन इलाकों में सड़क, पानी, सीवर और दूसरी बुनियादी सुविधाएं बेहतर होंगी। दिल्ली नगर निगम को दी जाने वाली सहायता राशि में 1,031 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है। अब निगम को 11,428 करोड़ रुपये मिलेंगे, जिससे सफाई व्यवस्था और स्थानीय विकास कार्यों में सुधार की उम्मीद है।

जल बोर्ड और यमुना सफाई के लिए भी
दिल्ली जल बोर्ड को दिए जाने वाले ऋण में 1,000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है, ताकि पानी और सीवर से जुड़ी परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकें। यमुना की सफाई के लिए यमुना एक्शन प्लान के तहत राज्य की हिस्सेदारी को 100 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 280 करोड़ रुपये किया गया है।

दिल्ली का भविष्य संवारने के लिए जरूरी – रेखा गुप्ता
मुख्यमंत्री ने कहा है कि 2025-26 का संशोधित बजट में साफ है कि भाजपा सरकार अब खर्च से ज्यादा निवेश की सोच के साथ आगे बढ़ रही है। मेट्रो, सड़क, बिजली, शिक्षा और पानी जैसे क्षेत्रों पर फोकस कर सरकार दिल्ली को भविष्य के लिए तैयार करने की कोशिश कर रही है।

जालंधर पुलिस कमिश्नर पर विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही संभव
दिल्ली विधानसभा के भीतर की वीडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर दर्ज एफआईआर को लेकर सदन में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने साफ कहा कि यह मामला सदन के विशेषाधिकार हनन से जुड़ा है और जिस वीडियो के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई, वह विधानसभा की संपत्ति है। ऐसे में इस वीडियो पर कार्रवाई करना और मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना बेहद गंभीर विषय है। अध्यक्ष ने संकेत दिए कि जालंधर के पुलिस कमिश्नर के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही पर सदन विचार करेगा।

सदन में विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा के भीतर की रिकॉर्डिंग केवल सदन की होती है, किसी व्यक्ति या बाहरी संस्था की नहीं। ऐसे में यह सवाल बेहद अहम है कि किस आधार पर इस वीडियो को लेकर मामला दर्ज किया गया। उन्होंने कहा कि जालंधर पुलिस कमिश्नर द्वारा सदन की संपत्ति में इस तरह का हस्तक्षेप सीधे तौर पर विशेषाधिकार हनन के दायरे में आता है। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि विपक्ष की मांग पर इस वीडियो क्लिप को फॉरेंसिक साइंस लैब भेजा गया है, ताकि किसी भी तरह का संदेह न रहे। चूंकि रिकॉर्डिंग सदन की है, इसलिए इसे टेम्पर्ड बताना खुद सदन की मर्यादा के खिलाफ है। इस कथित साजिश में जो भी लोग शामिल हैं, उनके खिलाफ सदन सख्त कार्रवाई करेगा। विधानसभा इस पूरे मामले का विधिवत संज्ञान ले रही है।

पुलिस का डर उन्हें डरा नहीं सकता : कपिल मिश्रा
इधर, दिल्ली के कला, संस्कृति और भाषा मंत्री ने इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा, अरविंद केजरीवाल की एफआईआर और पुलिस का डर उन्हें डरा नहीं सकता।

विधानसभा प्रकरण की आग एमसीडी तक पहुंची, बैठक हंगामे की भेंट चढ़ी
विधानसभा से उपजे सियासी विवाद की आग शुक्रवार को एमसीडी सदन तक पहुंच गई है। सदन की बैठक पूरी तरह हंगामे की भेंट चढ़ गई। आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। भाजपा पार्षदों ने आप नेता आतिशी की टिप्पणी पर निंदा प्रस्ताव पारित किया। इस कारण मेयर राजा इकबाल ने 10 मिनट तक बैठक स्थगित कर दी। पुन: बैठक शुरू होने के दौरान मेयर की ओर ये असंसदीय भाषा का उपयोग करने पर कांग्रेस की महिला पार्षदों के हंगामा करने पर बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित की गई।

सदन की बैठक शुरू होते ही नेता सदन प्रवेश वाही आप नेता आतिशी की टिप्पणी पर निंदा प्रस्ताव पढ़ने लगे, तभी आप पार्षदों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग की अगुवाई में आप पार्षदों ने प्रस्ताव की प्रति फाड़ने का प्रयास किया। हालात इतने बिगड़ गए कि भाजपा पार्षदों ने नेता सदन के चारों ओर घेरा बनाकर उन्हें सुरक्षा दी। भारी हंगामे के बीच किसी तरह निंदा प्रस्ताव पढ़ा गया, लेकिन माहौल शांत नहीं हुआ और दोनों ओर से एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई। पार्षदों के शांत नहीं होने पर मेयर ने सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी

बैठक दोबारा शुरू हुई तो कांग्रेस की महिला पार्षद अरीबा खान और नाजिया दानिश ने तुर्कमान गेट के सामने मस्जिद के सामने से हटाए गए अतिक्रमण पर बोलना शुरू किया। मेयर ने उनके प्रति रूखा व्यवहार अपनाते हुए असंसदीय भाषा का उपयोग किया। उनके इस बर्ताव का कांग्रेस के साथ आम आदमी पार्टी की महिला पार्षदों नेे कड़ा विरोध किया। मेयर के माफी मांगने के बावजूद कांग्रेस की महिला पार्षद शांत नहीं हुईं। सदन को अव्यवस्थित होता देख मेयर ने बैठक स्थगित कर दी। इस तरह हंगामे की वजह से सदन एजेंडा पास होने के अलावा कोई भी कामकाज नहीं हो सका।

आप पार्षदों ने मेयर कार्यालय का घेराव किया
बैठक के बाद आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने मेयर कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने मेयर से इस्तीफे की मांग करते हुए आरोप लगाया कि सदन में लोकतांत्रिक तरीके से काम नहीं होने दिया जा रहा है और विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है। आप पार्षदों का कहना था कि भाजपा सरकार मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए जानबूझकर हंगामा करवा रही है। मेयर महिला पार्षदों का अपमानित कर रहे है। लिहाजा मेयर के व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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