अध्यात्म

दुर्गा चालीसा की इन 4 चौपाइयों को रोजाना पढ़ने से दूर होता है भय

हिंदू धर्म देवी दुर्गा को सबसे शक्तिशाली और ममतामई कहा गया है। देवी दुर्गा में माता पर्वती, माता काली और माता सरस्‍वति की शक्तियां समाहित होती है। ऐसे में रोजाना दुर्गा चालीसा का पाठ करना बहुत अच्‍छा माना जाता है। खासतौर पर जीवन में आ रही चुनौतियों से अगर आप डर रहे हैं, तो दुर्गा चालीसा में कुछ ऐसी चौपाइयां भी हैं, जिनका पाठ करने से आपके अंदर का भय दूर हो जाएगा।

चलिए हम आपको ऐसी 4 चौपाइयों के बारे में बताते हैं, जो दुर्गा चालीसा में हैं और उनके जाप मात्र से आपके अंदर का भय दूर हो जाएगा।

प्रथम चौपाई
“नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी।।”

अर्थ: इस चौपाई का अर्थ ही है, कि हे सुख प्रदान करने वाली दुर्गा माता आपकी जय-जय कार हो। मेरे सारे दुख आपने हर लिए हैं, इसलिए मैं आपको बारंबार नमस्‍कार करता हूं।

यह दुर्गा चालीसा की सबसे पहली चौपाई है। जब भी आपको किसी बात से डर लगे, तो मन ही मन आपको इस चौपाई का जाप करते रहना चाहिए।

दूसरी चौपाई
कर में खप्पर खड्ग विराजै। जाको देख काल डर भाजै॥

अर्थ: इस चौपाई का अर्थ है, हे माता आपके हाथों में खप्पर और खड्ग सुशोभित हैं, जिनके भयानक रूप को देखकर मृत्यु और भय भी डरकर भाग जाते हैं।

दुर्गा चालीसा की 17वीं चौपाई भी बहुत प्रभावशाली है। यदि आपको अकाल मृत्‍यु का डर सता रहा है या आपकी कुंडली में अकाल मृत्‍यु का योग बन रहा है, तो इस चौपाई का जाप आप पूरे दिन करते रहें। आपके ऊपर आने वाला संकट दूर हो जाएगा।

तीसरी चौपाई
शत्रु नाश कीजै महारानी।सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥

अर्थ: इस चौपाई का अर्थ भी बहुत स्‍पष्‍ट है। इसमें लिखा है, हे देवी माता, मेरे शत्रुओं का नाश कीजिए। वे मेरे ध्‍यान को भटका रहे हैं। मेरा ध्यान केवल आप पर ही केंद्रित है, मैं आपको एकाग्रचित होकर स्मरण करता हूं। आप मेरे सभी शत्रुओं और कष्टों का नाश करें।

यह चौपाई दुर्गा चालीसा की 37वीं चौपाई है। यदि आपको अपने कार्यस्‍थल या रिश्‍तेदारी में कोई शत्रु नजर आ रहा है, जिसकी गतिविधियां आपको परेशान कर रही हैं, उसे नष्‍ट करने या उस पर विजय प्राप्‍त करने के लिए आप इस चौपाई का जाप कर सकती हैं।

चौथी चौपाई
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो।हिरणाकुश को स्वर्ग पठायो॥

अर्थ: इस चौपाई का अर्थ है, हे मां! आपने ही तो नरसिंह का रूप धारण किया था और अपने भक्त प्रह्लाद को उसके अत्याचारी पिता से बचाया था। राक्षस हिरण्यकशिपु का संहार कर उसका उद्धार किया था। आपका यह भक्‍त भी विपत्‍ती में हैं, अपने भक्‍त की रक्षा करिए मां।

यह चौपाई याद दिलाती है कि माता अपने भक्तों की हर विपत्ति में रक्षा करती हैं। जीवन में मानसिक, आर्थिक या शारीरिक किसी भी प्रकार की समस्‍या हो, इनसे बाहर आने के लिए आप देवी की इस चौपाई का रोजाना जाप करें।

अत: जीवन में आपको किसी भी प्रकार का भय या फिर तकलीफ हो, दुर्गा चालीसा का रोजाना पाठ करना आपको भयमुक्‍त कर सकता है।

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