नेतन्याहू ने ईरानी परमाणु ठिकानों की तुलना नाजी कैंपों से की

इजराइल के वार्षिक होलोकॉस्ट स्मृति दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान और उसके परमाणु कार्यक्रमों को लेकर निशाना साधा। नेतन्याहू ने ईरानी परमाणु केंद्रों की तुलना नाजी मृत्यु कैंपों से की।
इजरायल के वार्षिक होलोकॉस्ट स्मृति दिवस पर अपने संबोधन में नेतन्याहू ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा, “इजरायल अपने दुश्मनों के खिलाफ मजबूती से खड़ा है हमने वादा किया था कि दूसरा होलोकॉस्ट नहीं होगा, और इस साल हमने उस वादे को हमने पूरा किया है।”
हमने कार्रवाई नहीं की होती तो…
नेतन्याहू ने कहा, “अगर हमने कार्रवाई नहीं की होती, तो नतान्ज, फोर्डो, इस्फहान और पारचिन के नाम ऑशविट्ज, ट्रेब्लिंका, माजदानेक और सोबिबोर की तरह ही हमेशा के लिए बदनामी के साथ याद किए जाते।”
इस दौरान नेतन्याहू ने न सिर्फ ईरान दो दिए गए झटके का जिक्र किया, बल्कि यूरोप की नैतिक कमजोरी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि देश अपने अस्तित्व के लिए उत्पन्न खतरों को बेअसर करने और अपने अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए निर्णायक कार्रवाई कर रहा है।
यूरोप खो रहा अपने सभ्यता की जिम्मेदारी
नेतन्याहू ने यह भी चेतावनी दी कि यूरोप अपनी पहचान, अपने मूल्यों और सभ्यता की रक्षा करने की अपनी जिम्मेदारी पर से नियंत्रण खो रहा है। उन्होंने यूरोप को गहरी नैतिक कमजोरी से पीड़ित बताते हुए कहा कि आज इजरायल न केवल अपनी रक्षा कर रहा है, बल्कि उस यूरोप की भी रक्षा कर रहा है जो “होलोकॉस्ट के बाद से बहुत कुछ भूल चुका है।”
नेतन्याहू ने आगे कहा, “इसे हमसे बहुत कुछ सीखना है, खासकर अच्छाई और बुराई के बीच स्पष्ट नैतिक अंतर का आवश्यक पाठ, जो सच्चाई के क्षणों में हमसे यह मांग करता है कि हम अच्छाई के लिए, जीवन के लिए युद्ध करें।”
इजरायल अमेरिका के साथ सबसे आगे
उन्होंने कहा, “हम अमेरिका के साथ-साथ उन अन्य देशों के साथ जिनके साथ हम भविष्य में चर्चा में आने वाले गठबंधन बना रहे हैं, हम अपनी रक्षा कर रहे हैं, हम पूरी दुनिया की रक्षा कर रहे हैं। इजरायल स्वतंत्र दुनिया में अमेरिका के साथ सबसे आगे खड़ा है। पिछले एक साल में किए गए दो संयुक्त अभियानों में अमेरिका और इजरायल ने ईरान में दुष्ट शासन को करारा झटका दिया है”।
नाजियों ने की थी 60 लाख यहूदियों की हत्या
बता दें कि होलोकॉस्ट द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1941 से 1945 के बीच अपने चरम पर था। यह 1933 में नाजी जर्मनी के सत्ता में आने के बाद से शुरू हुआ था। इस दौरान नाजियों और उनके सहयोगियों ने सुनियोजित तरीके से लगभग 60 लाख यहूदियों की हत्या की थी। यह नरसंहार 1945 में युद्ध समाप्त होने तक चला।




