
पंजाब में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव में आम आदमी पार्टी सबसे बड़े दल के रूप सामने आई। साल 2018 से 2025 तक पार्टी ने ग्रामीण इलाकों में अपनी परफार्मेंस में खासा सुधार किया। अब पार्टी फरवरी 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले गांवों में अपनी बैठ और बढ़ाना चाहती है और इसके लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मोर्चा संभाल लिया है।
पंजाब के ग्रामीण इलाकों में 1.36 करोड़ से अधिक मतदाता हैं, यानी कुल मतदाताओं का करीब 63.55 प्रतिशत। लिहाजा इन मतदाताओं पर सभी दलों का फोकस रहता है। हाल ही में इन्हीं मतदाताओं पर केंद्रित चुनाव में सभी दलों ने खूब जोर लगाया। जिला परिषद चुनाव की स्थिति देखें तो आप का जीत प्रतिशत 62.82 रहा। कांग्रेस का जीत प्रतिशत 17.87, शिअद का 13.26, भाजपा का 2.02, आजाद का 2.88 और बसपा का 0.86 प्रतिशत रहा। पंचायत समिति चुनाव में आप का जीत प्रतिशत 53.95 रहा जबकि कांग्रेस का 21.53, शिअद का 15.82, आजाद का 5.07, भाजपा का 2.57 व बसपा का 0.99 प्रतिशत दर्ज किया गया।
इसमें कोई दो राय नहीं कि आम आदमी पार्टी ने इन चुनाव में अपेक्षाकृत बढि़या प्रदर्शन किया है मगर पार्टी सूत्र बताते हैं कि आप को ज्यादा वोट प्रतिशत के साथ इन चुनाव में इससे बड़ी जीत की उम्मीद थी। खैर, इन चुनाव ने आप को यह बल जरूर दिया कि उनकी सियासी जमीन गांवों में मजबूत हो रही है। गांवों में इसी पैठ को बढ़ाने के लिए अब आप ने अपनी रणनीति बदली है। इसके तहत सीएम अब गांवों में संवाद की मुहिम तेज करेंगे।
यह है आप की रणनीति
संवाद के जरिये सीएम भगवंत मान ग्रामीणों से सीधे रूबरू होते हुए उनकी शिकवे-शिकायतें सुनेंगे। चार साल में आप ने ग्रामीण विकास के लिए क्या-क्या किया, ग्रामीणों का जीवन स्तर उठाने के क्या प्रयास हुए व सूबे में सर्वांगीण विकास के लिए सरकार का रोडमैप क्या है, इसकी जानकारी भी सीएम संवाद कार्यक्रम के माध्यम से देंगे। सीएम लोगों को यह भी बताएंगे कि सरकार सभी को जल्द 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज देने के लिए सीएम स्वास्थ्य योजना को जल्द लागू करने वाली है। सीएम यह भी आश्वस्त कर चुके हैं कि चालू परियोजनाओं के लिए भी सरकार की ओर फंड की कोई कमी नहीं होने दी जाएंगी। इसी रणनीति के तहत आप अब ग्रामीण मतदाताओं पर अपनी पकड़ को और मजबूत करने की कोशिश करेगी।
कांग्रेस और शिअद भी उत्साही
कांग्रेस और शिअद को भले ही इस चुनाव में बड़ी जीत हासिल नहीं हुई मगर उनके नेता इस बात से उत्साहित दिख रहे हैं कि विपक्ष में रहने के बावजूद उनके प्रत्याशियों ने चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया है। अपने-अपने वोट प्रतिशत से ये दल ज्यादा खुश तो नहीं है मगर बहुत ज्यादा निराश भी नहीं हैं। इन दलों के नेताओं का आरोप है कि कई सीटों पर जीत का अंतर बहुत कम रहा और कई जगह तो उनके प्रत्याशियों को धक्केशाही के चलते नामांकन नहीं भरने दिया। कई प्रत्याशियों का नामांकन रद्द हो गए, अन्यथा नतीजों की स्थिति कुछ और होती।



