
कृषि क्षेत्र में एनपीए में पिछले साल के मुकाबले हालांकि कमी आई है लेकिन अब भी एनपीए खातों की दर चिंताजनक है। यही कारण है कि समिति ने बैंकों को अपनी वसूली प्रक्रियाओं में सुधार करने के लिए कहा गया है।
पंजाब के हर किसान पर औसतन 2.93 लाख रुपये का कर्ज है। प्रदेश के 35.72 लाख किसानों पर कुल 1.05 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बोझ है और पिछले कुछ समय से इसमें लगातार वृद्धि हो रही है।
सूबे के किसान बैंकों के 8955 करोड़ रुपये नहीं चुका पाए हैं, जिस कारण 2.47 लाख खाते नॉन परफार्मिंग एसेट (एनपीए) घोषित हो चुके हैं, जिसने बैंकों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ समय से इस कर्ज में वृद्धि होती जा रही है। यही कारण है कि समिति ने सभी बैंकों को ऋण संबंधी रणनीति की समीक्षा करने के भी निर्देश दिए हैं, ताकि कृषि क्षेत्र में वित्तपोषण को गति देने के लिए नए उपायों पर काम किया जा सके।
कृषि क्षेत्र में एनपीए में पिछले साल के मुकाबले हालांकि कमी आई है लेकिन अब भी एनपीए खातों की दर चिंताजनक है। यही कारण है कि समिति ने बैंकों को अपनी वसूली प्रक्रियाओं में सुधार करने के लिए कहा गया है, जिसमें बकाया खातों की समयबद्ध निगरानी, कानूनी और वसूली चैनलों का प्रभावी उपयोग, जिला स्तर पर वसूली अभियान और बैंकों द्वारा वसूली कार्यवाही में तेजी लाने के लिए जिला प्रशासन का सहयोग लेना शामिल हैं।
इसी तरह प्रदेश के 10.35 लाख किसान 24,836 करोड़ के टर्म लोन के जाल में भी फंसे हुए हैं जो कुल कर्ज का 23.60% है। टर्म लोन एक ऐसा ऋण होता है जो आपको एक निश्चित राशि के रूप में मिलता है और जिसे एक तय अवधि में निश्चित किस्तों में चुकाना होता है जिसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल होते हैं।
पंजाब के किसानों पर कर्ज प्रतिशत सबसे अधिक
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार पंजाब के 54.4 प्रतिशत किसान परिवारों पर औसत 2.03 लाख रुपये का कर्ज था और सूबा उन टॉप 10 राज्यों में शामिल था जहां किसानों पर कर्ज प्रतिशत सबसे अधिक है। लेकिन पिछले कुछ समय से प्रत्येक किसान परिवार के औसत कर्ज में वृद्धि हुई है और अब यह 2.93 लाख प्रति किसान परिवार पहुंच गया है।
रिपोर्ट के अनुसार फसल उत्पादन से पंजाब में किसानों की औसत मासिक आय 12,597 रुपये है। अगर कुल आय की बात की जाए तो वह 26,701 रुपये है। इसमें फसल उत्पादन, वेतन-भत्ते, भूमि को लीज आउट करने, पशु पालन और गैर कृषि व्यवसाय शामिल है। किसानों की आय बढ़ाने व उनको आर्थिक प्रोत्साहन देने के लिए केंद्र सरकार पीएम किसान, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना व कृषि क्षेत्र के लिए संस्थागत ऋण समेत अन्य योजनाएं चला रही है।
स्टैंडिंग कमेटी ने की थी एमएसपी की सिफारिश
कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण की संसदीय स्थायी समिति ने वर्ष 2024 में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की लीगल गारंटी देने की सिफारिश की गई थी। साथ ही कर्ज माफी के लिए ऋण माफी योजना लाने और प्रधानमंत्री किसान स्कीम में किसानों को दी जाने वाली राशि को 6 हजार से बढ़ाकर 12 हजार करने की भी सिफारिश की थी।
खेती की लागत बढ़ती जा रही है, जिस कारण किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। पंजाब के हर किसान पर औसतन 2.93 लाख का कर्ज एक बड़ा संकेत है। केंद्र सरकार को किसानों की आय बढ़ाने के लिए काम करना होगा। इसमें एमएसपी की कानूनी गारंटी लागू की जा सकती है या फिर सरकार कोई नई नीति ला सकती है। जब तक किसानों को राहत नहीं मिलेगी, तब तक किसानी पर कर्ज बढ़ता जाएगा। – सरवन सिंह पंधेर, किसान नेता, किसान मजदूर मोर्चा।




