
केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, हेमकुंड साहिब उच्च हिमालयी क्षेत्र में होने से यहां पल-पल मौसम बदलता है। घाटियों में धुंध व बारिश हेलिकॉप्टरों की उड़ान में बाधा उत्पन्न करने के साथ हादसे का खतरा बना रहता है।
आगामी चारधाम यात्रा के दौरान उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सुरक्षित हेलिकॉप्टरों की उड़ान के लिए पल-पल की मौसम की जानकारी मिलेगी। इसके लिए पहली बार केदारनाथ व बदरीनाथ धाम में हवाई यातायात नियंत्रण (एटीसी) प्रणाली स्थापित की जाएगी। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण की ओर से केदारनाथ हेली सेवा के लिए 25 फरवरी तक टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, हेमकुंड साहिब उच्च हिमालयी क्षेत्र में होने से यहां पल-पल मौसम बदलता है। घाटियों में धुंध व बारिश हेलिकॉप्टरों की उड़ान में बाधा उत्पन्न करने के साथ हादसे का खतरा बना रहता है। पिछले साल केदारनाथ व उत्तरकाशी में दो हेलिकॉप्टरों हादसों में 13 लोगों की मौत हुई। इसके बाद डीजीसीए व यूकाडा ने हेलिकॉप्टरों की सुरक्षित उड़ान के लिए सख्त कदम उठाए।
सिरसी व सहस्त्रधारा हेलिपैड पर एटीएस प्रणाली स्थापित की गई। इस बार चारधाम यात्रा शुरू होने पहले यूकाडा की ओर से केदारनाथ व बदरीनाथ धाम में एटीसी प्रणाली स्थापित की जाएगी। जिससे मौसम की पल-पल की जानकारी मिलेगी। इसके अलावा हेलिकॉप्टरों की उड़ान पर लाइव ट्रैकिंग से निगरानी रखी जाएगी।
उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के सीईओ आशीष चौहान का कहना है कि प्रदेश में सुरक्षित हेली सेवा के संचालन के लिए फुल प्रूफ व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जा रहा है। 25 फरवरी तक केदारनाथ हेली सेवा के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी।
इसके बाद केदारनाथ व बदरीनाथ धाम में एटीसी सिस्टम लगाए जाएंगे। इस सिस्टम से मौसम संबंधित जानकारी मिलेगी। यदि मौसम खराब होता है तो हेलिकॉप्टरों को उड़ान की अनुमति नहीं दी जाएगी।



