बरेली में मलेरिया की दस्तक, तीन मरीज मिले, घातक फेल्सीपेरम की चपेट में आई किशोरी

बरेली में बर्फीली हवा और कड़ाके की ठंड का असर थमने के बाद मच्छरों का प्रकोप शुरू हो गया है। करीब तीन माह बाद जिले में मलेरिया के मरीज मिलने लगे हैं। मझगवां निवासी 16 वर्षीय किशोरी घातक फेल्सीपेरम मलेरिया की चपेट में मिली है। भमोरा के दो लोग विवैक्स से पीड़ित हैं।
जिला मलेरिया अधिकारी सत्येंद्र कुमार के मुताबिक, तापमान 20 डिग्री के नीचे पहुंचने पर मच्छरों के लार्वा पनप नहीं पाते। इसलिए सर्दियों में मच्छरों का हमला थम जाता है। अब पारा 20 डिग्री के ऊपर दर्ज हो रहा है। दिन में चटख धूप और शाम को हल्की ठंड बैक्टीरिया, परजीवी और वायरस के लिए अनुकूल है। परजीवी से संक्रमित मच्छर अगर स्वस्थ व्यक्ति को काट ले तो वह भी चपेट में आ जाते हैं। फेल्सीपेरम का इलाज समय पर न हो तो जान का जोखिम रहता है। विवैक्स सामान्य बुखार की तरह होता है लेकिन इलाज 14 दिनों तक चलता है।
उन्होंने बताया कि जो मरीज चपेट में मिले हैं, उनके घर के पास निरोधात्मक कार्रवाई कराई है। मरीज के परिजन में बुखार के लक्षण नहीं मिले। अगर कोई लक्षण उभरे तो परिजन को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सक से परामर्श लेने का सुझाव दिया गया है।
फेल्सीपेरम के लक्षण
तेज बुखार, पेशाब का रंग बदलना, भ्रम, बदहवासी, दौरे आना, कमजोरी, जोड़ों में दर्द, जी मिचलाना। रोगी को सरकारी अस्पताल में चार दिन तक निशुल्क दवा दी जाती है।
विवैक्स के लक्षण
कंपकंपी के साथ तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, पेट के बाएं हिस्से में दर्द, हीमोग्लोबिन कम होना, जोड़ों में दर्द, जी मिचलाना। 14 दिन तक निशुल्क दवा का कोर्स चलता है।




