
गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय और विश्व संवाद केन्द्र उदयपुर के तत्वावधान में कला, साहित्य और वैचारिक संवाद के उत्सव के रूप में माही टॉक फेस्ट आरंभ हुआ। बांसवाड़ा जिले में पहली बार नेशनल बुक ट्रस्ट के पुस्तक मेले और संविधान विषयक प्रदर्शनी आयोजित की गई। वहीं शाम को मेवाड़–वागड़ की लोक संस्कृति के नृत्यों गवरी और गेर नृत्य की प्रस्तुति ने सांस्कृतिक सेतु बांध दिया।
माही टॉक फेस्ट के तहत नेशनल बुक ट्रस्ट के बुक फेयर और संविधान विषयक प्रदर्शनी का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. केशव सिंह ठाकुर ने किया। प्रो. राजश्री चौधरी एवं रुचि श्रीमाली ने बुक फेयर और प्रदर्शनी के उद्देश्य व विषयवस्तु की जानकारी देते हुए बताया कि यह आयोजन पाठकों को भारतीय संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और समकालीन विचारधाराओं से जोड़ने का प्रयास है। ठाकुर ने नेशनल बुक ट्रस्ट, विश्व संवाद केंद्र एवं अन्य प्रकाशकों के स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि कला, साहित्य और संवाद के इस उत्सव के अंतर्गत आयोजित नेशनल बुक ट्रस्ट का बुक फेयर और संविधान विषयक प्रदर्शनी बांसवाड़ा में पुस्तक संस्कृति और संवैधानिक चेतना को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण होगी। बुक फेयर में 500 से अधिक टाइटल और 2000 से ज्यादा पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं।
गवरी और गेर की धूम
माही टॉक फेस्ट के अंतर्गत शाम को हरिदेव जोशी रंगमंच पर मेवाड़ और वागड़ अंचलों की लोक संस्कृति का ऐसा जीवंत संगम देखने को मिला। मेवाड़ की आध्यात्मिक लोक नाट्य परंपरा गवरी और वागड़ की लोकनृत्य विधा गेर ने लोक संस्कृति के समन्वय की मिसाल प्रस्तुत की। लोकनाट्य कलाकार अमित गमेती के निर्देशन में मंचित ‘गवरी साधना’ में पारंपरिक वेशभूषा, मुखौटे, प्रतीकात्मक नृत्य और गवरी-शैली (मेवाड़ी भाषा) में संवादों के माध्यम से कलाकारों ने गवरी की सदियों पुरानी परंपरा को मंच पर सजीव कर दिया। इसके पश्चात वागड़ के लोक कलाकार धारजी भाई एवं दल ने वागड़ की होली परंपरा से जुड़े गेर लोकनृत्य की प्रस्तुति देकर रंगमंच को उत्सव में बदल दिया। इस मौके पर डॉ. सरला पंड्या, विक्रम सिंह, मदनमोहन टांक, डॉ. कमलेश शर्मा, डॉ. सुनील खटीक,विकास छाजेड़ आदि ने कलाकारों का उपरणा पहना कर अभिनंदन किया। संचालन रंगकर्मी सतीश आचार्य ने किया।




