महाराष्ट्रराज्य

महाराष्ट्र बजट सत्र आज से शुरू: पहली बार बिना LoP के चलेगा विधानमंडल

महाराष्ट्र विधानसभा का सोमवार से शुरू होने वाला बजट सत्र राज्य के इतिहास में पहला ऐसा सत्र होगा जिसमें विधानसभा और विधान परिषद दोनों में नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) नहीं होगा। यह स्थिति 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद बनी रही है, जब किसी भी विपक्षी दल ने नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) की मान्यता के लिए आवश्यक 10 प्रतिशत सीटें हासिल नहीं कीं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा यह निर्णय विधानसभा अध्यक्ष और परिषद अध्यक्ष का अधिकार है। मैं इस पर टिप्पणी नहीं कर सकता।

विपक्ष ने उठाया लोकतंत्र संकट का मुद्दा
महाविकास आघाड़ी (एमवीए) ने इस स्थिति को लोकतांत्रिक मानदंडों के लिए खतरा बताया। उनका कहना है कि एलओपी की अनुपस्थिति संस्थागत जांच और संतुलन की प्रणाली को कमजोर करती है, खासकर जब भाजपा नेतृत्व वाली महायुति सरकार का बहुमत प्रभावशाली है। शिव सेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने इसे लोकतंत्र पर कलंक करार देते हुए कहा कि विपक्षी दलों की संवैधानिक भूमिका को प्रभावित किया जा रहा है। शिव सेना (यूबीटी) विधायक भास्कर जाधव ने भी आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर कर रही है।

LoP पद की रिक्तता और कानूनी स्थिति
भास्कर जाधव ने विधानसभा प्रशासन को लिखित रूप से स्पष्टता मांगी थी कि एलओपी नियुक्ति के लिए कोई नियम या कानून मौजूद है या नहीं। उन्हें जानकारी मिली कि इस संबंध में कोई विशिष्ट वैधानिक प्रावधान नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि पहले कुछ दलों को जिनकी संख्या एक अंकीय थी, एलओपी पद दिया गया था, जबकि शिव सेना (यूबीटी) के 20 विधायक होने के बावजूद उन्हें यह अधिकार नहीं मिला।

विधान परिषद की स्थिति
78 सदस्यीय विधान परिषद में कांग्रेस की एमएलसी प्रज्ञान्य सटाव के इस्तीफे ने विपक्ष की स्थिति और जटिल कर दी। उनका इस्तीफा 18 दिसंबर 2025 को हुआ और इसके बाद उन्होंने भाजपा में शामिल होकर सरकार का समर्थन किया। इससे कांग्रेस की परिषद में संख्या घटकर सात रह गई और एलओपी पद का दावा असंभव हो गया। पूर्व कांग्रेस राज्य अध्यक्ष नाना पाटोले ने आरोप लगाया कि इस्तीफों के पीछे प्रलोभन और पदों के वादे का इस्तेमाल किया गया, जिसे ऑपरेशन लोटस रणनीति का हिस्सा बताया गया।

Related Articles

Back to top button