
मानगो नगर निगम मेयर चुनाव में भाजपा के पत्ते खुल गए हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में अभी भी चाणक्य कहे जाने वाले विधायक सरयू राय की चुप्पी से सस्पेंस बरकरार है।
भाजपा ने मानगो व जुगसलाई में अपने समर्थित उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, लेकिन जदयू विधायक सरयू राय ने नामांकन दाखिल करने की समय सीमा खत्म होने के बाद ही जदयू समर्थित उम्मीदवार की घोषणा करने का दांव चला है। उनकी इस चुप्पी से सियासी माहौल गरमा गया है और हर उम्मीदवार की धड़कन तेज हो गई है।
मानगो नगर निगम का यह मेयर चुनाव, किसी सियासी दंगल से कम नहीं है। राजनीतिक पंडित इसे सरयू-स्वयंवर की संज्ञा दे रहे हैं। सरयू राय ने अपना पत्ता न खोलकर सभी को संशय की स्थिति में डाल दिया है।
सियासी गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि सरयू राय, जिन्हें राजनीति के चाणक्य के रूप में जाना जाता है, उन्होंने भाजपा के दांव के बाद अपनी चाल चलने के लिए सही समय का इंतजार कर रहे हैं। इस दांवपेंच ने उम्मीदवारों की बेचैनी बढ़ा दी है।
कई उम्मीदवार पहुंचे दरबार
मानगो मेयर पद के कई उम्मीदवार फिलहाल सरयू राय के दरबार में डेरा जमाए हुए हैं। इसमें वे उम्मीदवार भी शामिल हैं जिन्हें भाजपा से नैतिक समर्थन मिला है। उन्हें उम्मीद है कि शायद अंतिम समय में चाणक्य की नजरे इनायत हो जाए और उनकी किस्मत का ताला खुल जाए।
वहीं, जिन उम्मीदवारों को भाजपा का समर्थन नहीं मिला, वे भी आखिरी उम्मीद लेकर सरयू राय के पास दौड़ लगा रहे हैं। एक उम्मीदवार तो अपनी पैरवी के लिए धनबाद के एक सियासी गढ़ पर आस टिकाए हैं, ताकि सरयू राय तक उनकी आवाज पहुंच सके।
सरयू राय के अगले कदम पर नजर
हाल ही में सरयू राय ने मानगो मेयर पद पर जदयू का दावा ठोकते हुए कहा था कि उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू से बात की थी। भाजपा के पत्ते खोलने के बाद अब चाणक्य कौन सी चाल चलते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।
एक उम्मीदवार ने गुदगुदाते हुए कहा, भाई! यह चुनाव है या स्वयंवर? भाजपा ने तो समर्थन दे दिया, लेकिन जब तक सरयू बाबू की मुहर नहीं लगेगी, तब तक न तो नींद आ रही है और न चैन।
सियासी पंडितों के अनुसार, सरयू राय की चुप्पी एक रणनीति का हिस्सा है। वे चाहते हैं कि नामांकन प्रक्रिया के अंतिम चरण में उम्मीदवार उनके पास आएं और उनकी शर्तों पर समझौता करें।
इससे उनका सियासी वजन बढ़ेगा और वे मानगो की राजनीति में अपना प्रभाव बनाए रख पाएंगे। यह समय ही बताएगा कि भाजपा के दांव के बाद चाणक्य कौन सी चाल चलकर बाजी अपने नाम करते हैं।





