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 मिलने वाली है खुशखबरी, डीए में होगी बढोतरी; 8वें नहीं 7वें वेतन आयोग से मिलेगा फायदा

8वें वेतन आयोग के चर्चाओं के बीच 2026 की शुरुआत हो चुकी है। जनवरी का महीने जारी है। लेकिन अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) कब लागू होगा। इन चर्चाओं के बीच केंद्रीय कर्मचारियों के लिए गुड न्यूज है। यह खबर डीए हाईक को लेकर है।

केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स को जनवरी में ही सैलरी और पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी मिल सकती है, जिसमें महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) में बढ़ोतरी की संभावना है। दरअसल, केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय ने नवंबर 2025 के लिए ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (AICPI-IW) जारी किया है। यह इंडेक्स 148.2 पर रहा।

DA Hike: मिलने वाली है खुशखबरी, बढ़ने वाला है डीए
केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा जारी किया गया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स के जरिए ही केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के महंगाई भत्ते (DA Hike) को तय किया जाता है। यह डीए और डीआर में बढ़ोतरी करने का एक आधार है। इसी से सैलरी और पेंशन की सही वैल्यू का अंदाजा लगाया जाता है।

जनवरी 2026 में DA बढ़ोतरी, जिसमें महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया जा सकता है। यह महंगाई भत्ता 7वें वेतन आयोग के तहत ही किया जाएगा।

हर साल दो बार महंगाई भत्ता बढ़ाया जाता है। जनवरी 2026 में इसे फिर से रिवाइज करना है। इससे पहले सरकार ने जुलाई 2025 में डीए को रिवाइज किया था और इसे 55 फीसदी से बढ़ाकर 58 फीसदी किया था।

डीए में कितनी होगी बढ़ोतरी?
यह बढ़ोतरी शायद पूरे पे कमीशन में बदलाव जितनी एक्साइटमेंट पैदा न करे, लेकिन इसकी टाइमिंग इसे अहम बनाती है। महंगाई लगातार घरों के बजट पर असर डाल रही है और 8वां पे कमीशन अभी काफी दूर है, ऐसे में यह 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की संभावना है। हालांकि, अभी सरकार की ओर से इस पर पर कुछ नहीं कहा गया है।

7वें वेतन आयोग ने 31 दिसंबर, 2025 को आधिकारिक तौर पर अपना कार्यकाल पूरा कर लिया, लेकिन महंगाई भत्ते की गणना सिर्फ कमीशन की टाइमलाइन पर आधारित नहीं होती। DA महंगाई से जुड़ा होता है, खासकर ऑल-इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (AICPIN-IW) से।

जुलाई से दिसंबर 2025 तक के डेटा से पता चला कि खाना, ट्रांसपोर्ट और हेल्थकेयर जैसी जरूरी चीजों पर लागत का दबाव बना हुआ था, जिससे फ्रेमवर्क बंद होने से पहले एक आखिरी एडजस्टमेंट करना जरूरी हो गया था।

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