यूपी: युवाओं के एआई प्रशिक्षण ही नहीं पेटेंट को भी लगेंगे पंख, छात्रों की बढ़ाएंगे रोजगार क्षमता

प्रदेश के युवाओं को सरकार की ओर से एआई कौशल से सशक्त करने और उनकी रोजगार क्षमता बढाने पर बजट में फोकस किया गया है। इसी क्रम में उच्च शिक्षण संस्थानों में स्नातक-परास्नातक कर रहे छात्रों को एआई में किए गए नवाचार व स्टार्टअप आदि के पेटेंट कराने के लिए भी उच्च शिक्षा विभाग सहयोग करेगा। इसके लिए 10 करोड़ बजट की व्यवस्था की गई है।
उच्च शिक्षा विभाग की ओर से शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के छात्रों को विश्वस्तरीय एआई कौशल में सशक्त बनाना है। ताकि न सिर्फ राज्य में एआई प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार किया जा सके बल्कि इसको ग्लोबल स्तर पर काम करने के लिए भी तैयार किया जा सके। प्रदेश के विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में छात्र एआई से जुड़ा न सिर्फ प्रशिक्षण ले रहे हैं बल्कि नवाचार भी कर रहे हैं।
स्टार्टअप भी तैयार कर रहे हैं। ऐसे में इनका प्रमाणन कराकर उसको ग्लोबल स्तर पर मान्यता दिलाई जा सकेगी। इससे उनको बेहतर निवेशक व स्टार्टअप को आगे बढ़ाने में सहयोग करने वाले भी मिलेंगे। इसी क्रम में उच्च शिक्षा विभाग सरकारी व अनुदानित कॉलेजों के छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए पेटेंट में लगने वाले शुल्क की प्रतिपूर्ति करेगा। इससे और छात्र भी न सिर्फ नवाचार करने बल्कि इसके पेटेंट के लिए भी आएंगे।
प्रदेश सरकार की ओर से इस साल पहली बार 225 करोड़ से यूपी एआई मिशन लांच करने की घोषणा की गई है। इससे काफी युवाओं को न सिर्फ इस अत्याधुनिक क्षेत्र में प्रशिक्षित किया जाएगा बल्कि उनके लिए निजी कंपनियों में रोजगार के अवसर भी खुलेंगे। यही वजह है कि सरकार ने प्रदेश की 49 आईटीआई में इंडिया डाटा स्लैब की स्थापना भी 32 करोड़ से करने की व्यवस्था की है। इस तरह नए उभरते हुए क्षेत्रों में युवाओं के लिए प्रदेश में काफी नए अवसर तैयार होंगे।
भारतीय ज्ञान परंपरा पर फोकस होगा शोध
प्रदेश के विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में अब भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी न सिर्फ पढ़ाई बल्कि शोध भी होगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की पहल पर अब प्रदेश में भी इस पर तेजी से काम शुरू होगा। इसके लिए विश्वविद्यालयों में भारतीय ज्ञान परंपरा संवर्धन शोध पीठ की स्थापना की जाएगी।
उच्च शिक्षा विभाग ने इसके लिए बजट में पांच करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। इससे पहले चरण में दस विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में इस पर शोध शुरू हो सकेगा। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री भारतीय ज्ञान प्रणाली वैश्विक उत्कृष्टता कोष भी स्थापना के लिए दस करोड़ की व्यवस्था की गई है।
एडेड कॉलेजों में बढ़ेगी आधारभूत सुविधाएं
प्रदेश के 331 अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) महाविद्यालयों को पहली बार वेतन से अतिरिक्त आधारभूत सुविधाओं के लिए भी उच्च शिक्षा विभाग की ओर से आर्थिक सहयोग किया जा सकेगा। इसके लिए विभाग ने बजट में तीन करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
प्रदेश के कई एडेड कॉलेजों में अपेक्षाकृत छात्रों के प्रवेश न होने से उन्हें बिल्डिंग की मरम्मत से लेकर अत्याधुनिक सुविधाओं के लिए पर्याप्त बजट की व्यवस्था नहीं हो पाती है। ऐसे में उच्च शिक्षा विभाग की यह पहल उनके लिए संजीवनी का काम करेगी।


