रथ सप्तमी-नर्मदा जयंती पर करें ये विशेष आरती, होगा मंगल ही मंगल

हिंदू धर्म में माघ महीने की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन न केवल सूर्य देव की पूजा का पर्व रथ सप्तमी मनाया जाता है, बल्कि मोक्षदायिनी मां नर्मदा का जन्मोत्सव यानी नर्मदा जयंती भी धूमधाम से मनाई जाती है। साल 2026 में यह पावन संयोग और भी शुभ फलदायी रहने वाला है।
ऐसा माना जाता है कि गंगा में स्नान करने से जो पुण्य मिलता है, वह पुण्य मां नर्मदा के केवल दर्शन मात्र से मिल जाता है, तो आइए इस पावन संयोग को और भी खास बनाने के लिए मां नर्मदा और सूर्य देव की विशेष आरती करते हैं, जिसे करने से जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
।।सूर्य देव की आरती।।
ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।
सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।
अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।
ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।
फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।
संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।
गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।
देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते।।
स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।
तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।
प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल, बुद्धि और ज्ञान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।
भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।
वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्वशक्तिमान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।
पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।
ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान।।
।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।
ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।स्वरूपा।।
धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।
॥ श्री नर्मदा माता जी की आरती ॥
ॐ जय जगदानन्दी,मैया जय आनंद कन्दी।
ब्रह्मा हरिहर शंकर रेवा,शिव हरि शंकर रुद्री पालन्ती॥
ॐ जय जगदानन्दी…॥
देवी नारद शारद तुम वरदायक,अभिनव पदचण्डी।
सुर नर मुनि जन सेवत,सुर नर मुनि शारद पदवन्ती॥
ॐ जय जगदानन्दी…॥
देवी धूमक वाहन राजत,वीणा वादयन्ती।
झूमकत झूमकत झूमकत,झननन झननन रमती राजन्ती॥
ॐ जय जगदानन्दी…॥
देवी बाजत ताल मृदंगा,सुरमण्डल रमती।
तोड़ीतान तोड़ीतान तोड़ीतान,तुरड़ड़ तुरड़ड़ तुरड़ड़ रमती सुरवन्ती॥
ॐ जय जगदानन्दी…॥
देवी सकल भुवन पर आप विराजत,निशदिन आनन्दी।
गावत गंगा शंकर, सेवत रेवाशंकर तुम भव मेटन्ती॥
ॐ जय जगदानन्दी…॥
मैया जी को कंचन थाल विराजत,अगर कपूर बाती।
अमरकंठ में विराजत,घाटन घाट कोटी रतन जोती॥
ॐ जय जगदानन्दी…॥
मैया जी की आरती निशदिन पढ़ि गावें,हो रेवा जुग जुग नर गावें।
भजत शिवानंद स्वामी,जपत हरि मन वांछित फल पावें॥
ॐ जय जगदानन्दी…॥


