लखनऊ: विश्व एकता योग समारोह में शमिल हुए सीएम योगी, राष्ट्रपति मुर्मु

ब्रह्माकुमारीज लखनऊ में विश्व एकता एवं विश्वास हेतु ध्यान (योग) राज्य स्तरीय उद्घाटन समारोह सम्पन्न हुआ. इस कार्यक्रम में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की ऋषि परंपरा हमेशा मानती रही है कि मन ही बंधन और मोक्ष दोनों का कारण है. सद्गुरु रविदास जी ने भी कहा था—मन चंगा तो कठौती में गंगा. यदि व्यक्ति अपनी बहिर्मुखी वृत्ति को अंतर्मुखी कर ले, तो न केवल आत्मिक संतुष्टि प्राप्त कर सकता है, बल्कि विश्व कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त कर सकता है.
उन्होंने कहा कि दुनिया में आज आतंकवाद, उपद्रव और अराजकता की जो स्थितियां दिखाई देती हैं, उसके मूल में मन की चंचल एवं नकारात्मक वृत्तियां हैं. भारत की परंपरा ने राक्षसी वृत्ति को ही आधुनिक रूप में आतंकवाद माना है और देश भौतिक तथा आध्यात्मिक दोनों स्तरों विरुद्ध संघर्ष कर रहा है.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु रहीं मौजूद
विश्व एकता एवं विश्वास हेतु ध्यान (योग) के राज्य स्तरीय उद्घाटन समारोह में संबोधित कर रहे थे. ऋषि परंपरा के ‘प्रसाद’ योग को वैश्विक मान्यता दिलाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को श्रेय. सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की योग परंपरा को विश्व, मंच पर स्थापित करते हुए 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने कहा कि योग भारत की सदियों पुरानी आध्यात्मिक धरोहर है, जिसे आज विश्वभर में सम्मान और स्वीकृति मिली है.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की संघर्ष गाथा हर भारतीय के लिए प्रेरणादायक—मुख्यमंत्री योगी
कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति का जीवन संघर्ष की अद्भुत गाथा है. एक शिक्षक के रूप में समाज को दिशा देने से लेकर पार्षद, राज्यपाल और फिर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक की उनकी यात्रा हर भारतीय के लिए प्रेरणा है.




