
दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए इस बार सरकार ने पहले ही तैयारी शुरू कर दी है। सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने के बाद प्रतिबंध लगाने के बजाय दिल्ली सरकार ने नवंबर से फरवरी तक लागू होने वाली शीतकालीन वायु गुणवत्ता प्रबंधन व्यवस्था अधिसूचित कर दी है। इसके तहत वाहनों, निर्माण गतिविधियों, पार्किंग, कार्यालयों और खुले में जलाने जैसी गतिविधियों पर पहले से नियंत्रण के उपाय तय किए गए हैं।
अब तक दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के बाद ग्रैप के तहत पाबंदियां लागू की जाती थीं, जिससे आम लोगों, व्यापारियों और संस्थानों को अचानक बदलावों के अनुसार खुद को ढालना पड़ता था। नई व्यवस्था में सरकार ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि नवंबर से फरवरी के बीच खराब हवा की स्थिति बनने पर कौन-कौन से कदम उठाए जा सकते हैं। इससे नागरिकों, आरडब्ल्यूए, उद्योगों, निर्माण एजेंसियों और सरकारी विभागों को पहले से तैयारी करने का समय मिलेगा।
पीयूसी के बिना नहीं मिलेगा पेट्रोल, बाहर के पुराने वाहनों पर रोक
नई व्यवस्था के तहत दिल्ली के सभी पेट्रोल पंपों पर केवल उन्हीं वाहनों को ईंधन मिलेगा, जिनके पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) होगा। इसके अलावा 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर-बीएस-6 वाणिज्यिक वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। हालांकि सीएनजी, इलेक्ट्रिक, आपातकालीन सेवाओं और सरकारी कार्यों से जुड़े वाहनों को छूट दी जाएगी।
पार्किंग महंगी, ऑफिसों में कम होगी भीड़
सर्दियों के दौरान निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के लिए 1 नवंबर से 28 फरवरी तक अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क दोगुना किया जाएगा। इसके साथ ही यातायात दबाव घटाने के लिए चरणबद्ध कार्यालय समय की व्यवस्था लागू की जा सकती है। सरकारी और निजी कार्यालयों में अधिकतम 50 प्रतिशत भौतिक उपस्थिति और बाकी कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम का प्रावधान रखा गया है। जरूरी और आपातकालीन सेवाओं को इससे छूट मिलेगी।
निर्माण कार्यों पर भी पहले से नजर
दिल्ली में निर्माण और ध्वस्तीकरण गतिविधियों से निकलने वाली धूल को प्रदूषण का बड़ा कारण माना जाता है। इसलिए सरकार ने परियोजना संचालकों और निर्माण एजेंसियों को पहले से अपनी योजना तैयार करने को कहा है। 1 नवंबर से 31 जनवरी तक निर्माण कार्यों को पर्यावरणीय मानकों और धूल नियंत्रण उपायों के साथ करना होगा। वहीं 10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच, जब प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा बढ़ने की संभावना रहती है, निर्माण गतिविधियों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। बड़े निर्माण स्थलों पर एंटी-स्मॉग गन, मिस्ट सिस्टम और अन्य धूल नियंत्रण उपायों को अनिवार्य किया जाएगा।
खुले में आग जलाने पर सख्ती, ड्रोन से होगी निगरानी
सरकार ने खुले में कचरा, पत्तियां और अन्य सामग्री जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए भी सख्त व्यवस्था की है। आरडब्ल्यूए, संस्थानों, ठेकेदारों और अन्य एजेंसियों को अपने क्षेत्रों में ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने की जिम्मेदारी दी जाएगी। सर्दियों में सुरक्षाकर्मियों और अन्य कर्मचारियों द्वारा आग जलाने की प्रवृत्ति रोकने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी। इसके लिए फील्ड सर्विलांस के साथ ड्रोन आधारित निगरानी को भी मजबूत किया जाएगा।
हर साल 1 नवंबर से 28 फरवरी तक प्रभावी रहेगी व्यवस्था
दिल्ली सरकार की ओर से जारी यह व्यवस्था सामान्य तौर पर हर वर्ष 1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू रहेगी और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के ग्रैप के साथ समानांतर रूप से काम करेगी। सरकार का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि नागरिकों, संस्थानों, उद्योगों और स्थानीय संगठनों की भागीदारी से ही दिल्ली की हवा को बेहतर बनाया जा सकता है।





