
20 फरवरी 2026 को शाम चार बजे ओडिशा विधानसभा में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करेंगे। यह उनकी सरकार का अहम बजट माना जा रहा है, जिस पर विकास की रफ्तार बनाए रखने के साथ-साथ बढ़ते सार्वजनिक कर्ज को नियंत्रित रखने की दोहरी चुनौती है।
कैबिनेट से मंजूरी प्राप्त प्रारूप के अनुसार इस बार बजट का आकार तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने की संभावना है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि कृषि, महिला सशक्तिकरण, युवा रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना पर विशेष जोर दिया जाएगा।
इसके साथ ही भुवनेश्वर-कटक-पुरी-पारादीप क्षेत्र को बड़े आर्थिक गलियारे के रूप में विकसित करने की दीर्घकालिक योजना को भी गति दी जा सकती है।
कर्ज का बढ़ता स्तर बना चर्चा का विषय
आर्थिक सर्वे के मुताबिक राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) लगभग 9.9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है और विकास दर 7 प्रतिशत से अधिक बनी हुई है। हालांकि राज्य पर कुल सार्वजनिक ऋण करीब 1.34 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जो जीएसडीपी का लगभग 13 से 14 प्रतिशत है।
सरकार का दावा है कि यह वित्तीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन कानून (एफआरबीएम) की सीमा के भीतर है और स्थिति नियंत्रण में है।
वित्तीय जानकारों का कहना है कि पूंजीगत व्यय बढ़ाने से दीर्घकाल में आर्थिक लाभ होगा, लेकिन राजकोषीय अनुशासन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। ब्याज भुगतान का अनुपात फिलहाल सुरक्षित दायरे में बताया जा रहा है।
सामाजिक क्षेत्र पर फोकस
सरकार ने सामाजिक सेवाओं पर व्यय बढ़ाने के संकेत दिए हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए आवंटन में वृद्धि की संभावना है। ग्रामीण सड़क, सिंचाई, पेयजल और शहरी बुनियादी ढांचे को भी प्राथमिकता सूची में रखा गया है। कृषि क्षेत्र में धान खरीद, सिंचाई विस्तार और किसानों की आय बढ़ाने से जुड़े प्रावधानों पर सबकी नजर रहेगी।
विधानसभा में गरमाएंगे राजनीतिक तेवर
बजट सत्र की शुरुआत से ही सदन में राजनीतिक माहौल गरम है। धान खरीद और किसान मुद्दों को लेकर विपक्षी दलों -बीजू जनता दल और इंडियन नेशनल कांग्रेस ने सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है। संभावना है कि बजट पेश होने के बाद अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान तीखी बहस देखने को मिले।
मुख्यमंत्री माझी पहले ही कह चुके हैं कि राज्य का वित्तीय प्रबंधन देश में बेहतर स्थिति में है और विकास व वित्तीय संतुलन दोनों को साथ लेकर चलने की रणनीति अपनाई गई है।
अब देखना यह होगा कि सरकार विकास योजनाओं को रफ्तार देने के साथ कर्ज और खर्च के बीच संतुलन किस प्रकार साधती है। बजट पर विस्तृत चर्चा के बाद आने वाले दिनों में इसकी वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी।




