राष्ट्रीय

स्टेम सेल और जीन थेरेपी को सेंट्रल लाइसेंसिंग ढांचे के तहत लाई सरकार

सरकार ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन किया है ताकि सेल या स्टेम सेल से बने उत्पादों, जीन थेरेपी उत्पादों और जेनोग्राफ्ट्स को सेंट्रली लाइसेंस्ड अप्रूविंग अथॉरिटी (सीएलएए) फ्रेमवर्क के तहत लाया जा सके। इस कदम का मकसद अत्याधुनिक एवं नई मेडिकल तकनीक पर नियामक निगरानी को मजबूत करना है।

ड्रग्स एंड कास्मेटिक्स एक्ट के तहत कुछ खास तरह की आवश्यक दवाओं और जैविक उत्पादों पर केंद्र और राज्य के नियामकों की संयुक्त निगरानी होती है। इनमें वैक्सीन, बड़ी मात्रा में इस्तेमाल होने वाले पैरेंट्रल (इंजेक्शन से दी जाने वाली दवाएं) और आर-डीएनए आधारित दवाएं शामिल हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस संशोधन के साथ इसके दायरे को बढ़ाया जा रहा है ताकि इसमें नई उभरती तकनीकों को भी शामिल किया जा सके।

सेल या स्टेम सेल से बने उत्पादों में स्टेम सेल-आधारित रीजेनरेटिव ट्रीटमेंट और सीएआर-टी सेल थेरेपी शामिल हैं। इनका इस्तेमाल ल्यूकेमिया और लिम्फोमा जैसे ब्लड कैंसर के इलाज में किया जा रहा है।

जीन रिप्लेसमेंट जैसे जीन थेरेपी उत्पादों और जीन एडिटिंग उत्पादों का इस्तेमाल जेनेटिक बीमारियों और कई तरह के कैंसर के इलाज में किया जाता है। जेनोग्राफ्ट्स जानवरों के टिश्यू से बने उत्पाद होते हैं, जैसे- हार्ट वाल्व। इन्हें इंसानों में प्रत्यारोपित किया जा सकता है और इनका इस्तेमाल

कार्डियोलाजी और ऑर्थोपेडिक्स में होता है। बयान में कहा गया है कि चूंकि ये तकनाक बेहद जटिल हैं और तेजी से विकसित हो रही हैं, इसलिए मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इनकी कड़ी नियामक जांच की जरूरत है।

Related Articles

Back to top button