अध्यात्म

साल के पहले गुरु प्रदोष व्रत पर इस तरह करें शिव जी को प्रसन्न

कहा जाता है कि नए साल की शुरुआत जैसी होती है, पूरा साल उसी तरह गुजरता है। ऐसे में आप अपने नए साल की शुरुआत भगवान शिव की आराधना के साथ कर सकते हैं। जो प्रदोष व्रत गुरुवार को पड़ता है, तो इसे गुरु प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है।

प्रदोष व्रत की विधि –
सबसे पहले सुबह उठकर शिव जी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प करें।
स्नान आदि से निवृत होकर घर व पूजा-स्थल की सफाई करें।
पूजा की थाली में जल, दूध, घी, बेलपत्र, पुष्प, अक्षत, दीपक और धूप रखें।
शिवलिंग का जल, दूध, घी और दही से अभिषेक करें।
शिव जी को बेलपत्र और फूल अर्पित करें।
दीपक जलाकर भगवान शिव के मंत्रों का जप व आरती करें।
शाम के समय पुजा मुहूर्त के दौरान पुनः विधि-विधान से शिव जी की पूजा-अर्चना करें।
फल ग्रहण करके अपने व्रत का पारण करें।
गुरु प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त – शाम 7 बजकर 15 मिनट से रात 9 बजकर 40 मिनट तक

भगवान शिव के मंत्र –
ॐ नमः शिवाय

ॐ नमो भगवते रूद्राय

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्

शिव जी की आरती
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।

ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव…॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।

हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव…॥

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।

त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव…॥

अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।

चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव…॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।

सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव…॥

कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।

जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव…॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।

प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव…॥

काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।

नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव…॥

त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावे ।

कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव…॥

जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा|

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा…॥

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