अध्यात्म

साल 2026 के पहले सोमवार पर ऐसे करें भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न

हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना गया है। मान्यता है कि सोमवार के दिन सच्चे मन से की गई पूजा से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों के कष्ट हर लेते हैं। वर्ष 2026 का पहला सोमवार अपने आप में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह पूरे वर्ष की आध्यात्मिक दिशा और सकारात्मक ऊर्जा को तय करता है। इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

प्रातः स्नान कर शिव संकल्प लें
साल के पहले सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। स्नान के जल में गंगाजल या थोड़े तिल मिलाना शुभ माना गया है। स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण कर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके भगवान शिव का ध्यान करते हुए वर्षभर के लिए सकारात्मक संकल्प लें। माना जाता है कि इस दिन लिया गया संकल्प शिव कृपा से शीघ्र फलित होता है।

शिवलिंग का अभिषेक करें
पहले सोमवार को शिवलिंग का अभिषेक विशेष फलदायी माना गया है। दूध, जल, दही, शहद और घी से अभिषेक करें। यदि यह संभव न हो तो केवल जल और बेलपत्र से भी पूजा की जा सकती है। अभिषेक करते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें। यह मंत्र मानसिक शांति, रोग निवारण और नकारात्मक ऊर्जा के शमन में सहायक माना गया है।

बेलपत्र और सफेद पुष्प अर्पित करें
भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है। ध्यान रखें कि बेलपत्र तीन पत्तियों वाला और टूटा-फटा न हो। साथ ही सफेद फूल, धतूरा या आक के फूल अर्पित करना भी शुभ होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे जीवन में स्थिरता और संतुलन बना रहता है।

सोमवार व्रत या संयम का पालन
यदि पूर्ण व्रत संभव न हो तो फलाहार या एक समय सात्विक भोजन करें। व्रत के साथ-साथ वाणी और व्यवहार में संयम रखना भी आवश्यक है। क्रोध, कटु वचन और नकारात्मक सोच से दूर रहना ही शिव भक्ति का वास्तविक स्वरूप माना गया है।

शिव चालीसा या रुद्राष्टक का पाठ
साल के पहले सोमवार को शिव चालीसा, रुद्राष्टक या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करने से विशेष लाभ मिलता है। माना जाता है कि इससे भय, असुरक्षा और अनिश्चितता दूर होती है तथा जीवन में नया उत्साह और आत्मविश्वास आता है।

जरूरतमंदों को दान
शिव पूजा के साथ दान का विशेष महत्व है। इस दिन सफेद वस्त्र, चावल, दूध, तिल या गर्म कपड़े दान करना शुभ माना गया है। दान से कर्मों की शुद्धि होती है और शिव कृपा स्थायी बनती है।

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