राजस्थानराज्य

ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हुए रिटायर्ड अधिकारी, हुआ 25 लाख का नुकसान

श्रीगंगानगर में पंजाब नेशनल बैंक के रिटायर्ड कर्मचारी परमजीत सिंह तनेजा के साथ ठगों ने ऑनलाइन धोखाधड़ी की। ठगों ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर खुद को मुंबई पुलिस और सीबीआई अधिकारी बताकर उन्हें डराया-धमकाया और मनी लॉन्ड्रिंग व आतंकवादी कनेक्शन का झूठा आरोप लगाकर करीब 25 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए। पीड़ित ने अब साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

सेतिया कॉलोनी निवासी परमजीत सिंह तनेजा, जो पंजाब नेशनल बैंक से रिटायर्ड हैं, को 23 दिसंबर 2025 को सुबह 11:14 बजे उनके व्हाट्सएप नंबर पर एक वीडियो कॉल आई। कॉल करने वाले ने अपना चेहरा छिपाया और खुद को मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन का अधिकारी बताया। ठग ने परमजीत से कहा कि उनका केनरा बैंक अकाउंट आतंकवादी गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हुआ है और एक आतंकवादी के पास उनका ATM कार्ड बरामद हुआ है। परमजीत ने इन आरोपों से इनकार किया, लेकिन ठग ने धमकी दी कि अधिकारी से सही तरीके से बात नहीं की तो पूरे परिवार को एनकाउंटर में मार दिया जाएगा।

ठगों ने परमजीत को TRAI का फर्जी नोटिस, ATM कार्ड की फर्जी PDF, प्रवर्तन निदेशालय (ED) का फर्जी अरेस्ट वारंट और CBI का मनी लॉन्ड्रिंग नोटिस भेजा। साथ ही फोटो भी भेजी, जिनमें एक व्यक्ति से कई ATM कार्ड बरामद होते दिखाए गए। 24 दिसंबर को ठगों ने परमजीत से उनके FD, म्यूचुअल फंड और सेविंग अकाउंट की डिटेल मांगी। डर के चलते उन्होंने सभी जानकारी दे दी। ठगों ने कहा कि FD तोड़कर पैसे उनके बताए अकाउंट में ट्रांसफर करें। परमजीत ने PNB की FD तोड़ी और पैसे यस बैंक के अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए। ठगों ने धमकी दी कि परिवार या बैंक से बात की तो सिविल ड्रेस में लोग गोली मार देंगे।

25 दिसंबर को ठगों ने फिर कॉल की और मोबाइल बैटरी 50% से नीचे न होने देने को कहा। परमजीत को 16-16 घंटे वीडियो कॉल पर रखा गया, जिससे वे मानसिक दबाव में आ गए। 26 दिसंबर को ठगों ने दूसरा अकाउंट नंबर भेजा, जिसमें परमजीत ने FD तोड़कर 11 लाख 52 हजार रुपये ट्रांसफर किए। कुल ठगी लगभग 25 लाख रुपये हुई।

2 जनवरी 2026 को परमजीत ने ठगों का नंबर मिलाया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने परिवार को घटना बताई और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की। बाद में साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। परमजीत ने कहा कि यह पैसा उनकी रिटायरमेंट की बचत थी, जो जीवनयापन का सहारा थी। साइबर अपराध विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि किसी अनजान कॉल पर कभी पैसे ट्रांसफर न करें। ठग फर्जी दस्तावेज और धमकी से मानसिक दबाव डालते हैं, लेकिन पुलिस या CBI कभी फोन पर पैसे नहीं मांगती।

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