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विदेश बैठकर हरियाणा में अपराध: सोशल मीडिया गैंगस्टरों का हथियार

प्रदेश में संगठित अपराध का चेहरा अब तेजी से डिजिटल और अंतरराष्ट्रीय होता जा रहा है। पुलिस मुख्यालय में डीजीपी अजय सिंघल की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में खुलासा हुआ कि कई कुख्यात गैंगस्टर विदेशों में सुरक्षित बैठकर सोशल मीडिया और इंटरनेट कॉलिंग के जरिये पूरे अपराध नेटवर्क का संचालन कर रहे हैं।

बैठक में आईजी एसटीएफ सतीश बालन ने बताया कि गैंगस्टर वर्चुअल नंबरों और फर्जी ऑनलाइन प्रोफाइल के जरिए अपने गिरोह के सदस्यों को निर्देश देते हैं। सोशल मीडिया के जरिये युवाओं को पहले लालच दिया जाता है, उनसे छोटे काम करवाए जाते हैं और फिर धीरे-धीरे उन्हें गंभीर अपराधों में शामिल कर लिया जाता है। जबकि गैंग के सरगना खुद विदेशों में बैठकर पूरी साजिश को अंजाम देते हैं। इन नेटवर्कों के जरिए न सिर्फ फिरौती और धमकी दी जा रही है, बल्कि नई भर्तियां करते युवाओं को अपराध की दुनिया में धकेलने का संगठित प्रयास भी चल रहा है।

बालन ने बताया कि एसटीएफ ऐसे अपराधियों पर लगातार निगरानी रखे हुए है और उन्हें भारत वापस लाने के लिए विदेशी एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि डिजिटल माध्यमों पर सख्ती और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बिना इस नेटवर्क को तोड़ना संभव नहीं है। बालन ने यह भी बताया कि एसटीएफ ऐसे अपराधियों पर लगातार निगरानी रख रही है और उन्हें विदेशों से डिपोर्ट करवाने के लिए विभिन्न देशों की एजेंसियों के साथ सक्रिय समन्वय कर रही है।

आंकड़ों से दावा, कार्रवाई से संदेश
बैठक में यह भी बताया गया कि हरियाणा पुलिस की सख्ती का असर दिखने लगा है। साल 2024 की तुलना में 2025 में फिरौती मांगने की वारदातों में 40 फीसदी कमी आई है। इसके अलावा पुलिस ने 9 टारगेटेड मर्डर की बड़ी साजिशों को समय रहते नाकाम करने का दावा किया है। हालांकि पुलिस ने दोनों वर्षों के तुलनात्मक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए है।

डीजीपी अजय सिंघल ने साफ कहा कि जो लोग जनता में डर और दहशत फैलाते हैं, चाहे वे देश में हों या विदेश में, उन्हें आतंकवादियों की श्रेणी में रखा जाएगा और उनके खिलाफ कानून के तहत सबसे कठोर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि संगठित अपराध का नेटवर्क तभी टूटेगा, जब पूरी संरचना, फंडिंग और विदेशी कड़ियों पर एक साथ प्रहार किया जाएगा। पुलिस अधिकारियों ने युवाओं को बचाने के लिए जागरूकता और काउंसलिंग कार्यक्रम बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया, ताकि सोशल मीडिया के जरिए फैल रहे अपराध के जाल को जड़ से खत्म किया जा सके।

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