ऑलराउंडरों के ‘एक्सपेरिमेंट’ में झुलसी टीम इंडिया, न्यूजीलैंड ने दूसरे वनडे में 7 विकेट से रौंदा

वडोदरा में खेले गए पहले वनडे में 301 रन के लक्ष्य का पीछा करने में भारतीय बल्लेबाजों के पसीने छूट गए थे तो राजकोट के निरंजन शाह स्टेडियम में खेले गए दूसरे वनडे में धीमी पिच पर भारतीय बल्लेबाजों का लचर प्रदर्शन, गेंदबाजों की दिशाहीन गेंदबाजी और खराब क्षेत्ररक्षण ने टीम की हार की पटकथा लिखी।
IND vs NZ: ऑलराउंडरों की प्रयोगशाला में जल रही भारतीय टीम
285 रन के लक्ष्य को डेरिल मिशेल (131*) और विल यंग (87) की पारियों के दम पर न्यूजीलैंड टीम ने 47.3 ओवर में हासिल कर लिया। न्यूजीलैंड ने सात विकेट से जीत दर्ज करते हुए तीन मैचों की सीरीज में 1-1 की बराबरी कर ली। भारत की हार का सबसे बड़ा कारण जबरदस्ती के बनाए गए आलराउंडरों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करना है।
इस कारण पूरी टीम ही भटकी-भटकी सी लग रही है। प्रारूप कोई भी हो चयनकर्ता और टीम प्रबंधन शुद्ध बल्लेबाज और शुद्ध गेंदबाज की जगह आलराउंडरों पर भरोसा कर रहे हैं। आलराउंडर भी हार्दिक पांड़या जैसा हो तो कोई बात है। नीतीश रेड्डी कहीं से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के आलराउंडर नजर नहीं आते हैं। वनडे में रवींद्र जडेजा का दम खत्म हो चुका है। छठे या सातवें नंबर पर कोई ऐसा बल्लेबाज नहीं जो तेजी से रन बनाकर सामने वाली टीम के धुर्रे उड़ा सके।
अगर टीम प्रबंधन हर्षित राणा में वह जड़ी-बूटी खोज रहा है तो उसे किसी अन्य वैद्य से सलाह लेने की जरूरत है। अगर इस मैच में रिंकू सिंह होते तो वह आखिरी में रनों की गति बढ़ा सकते थे। अगर ऊपर के दो-तीन बल्लेबाज रन नहीं बनाए तो वनडे टीम बिना ड्राइवर की दूरंतो नजर आती है जो 2027 विश्व कप का सफर तो करना चाहती है लेकिन उसको वहां तक पहुंचाने वाला कोई नहीं है।
आयुष बडोनी का चयन क्यों?
पहले वनडे में वाशिंगटन सुंदर (Washington Sundar) के चोटिल होने के बाद उनके विकल्प के रूप में आयुष बडोनी (Ayush Badoni) को शामिल करना समझ से परे हैं। सुंदर की जगह अक्षर पटेल कहीं ज्यादा अच्छे विकल्प होते। बहरहाल, दूसरे वनडे में टीम में केवल एक बदलाव किया गया। वाशिंगटन सुंदर की जगह नीतीश कुमार रेड्डी को मौका दिया गया। सातवें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे नीतीश ने 21 गेंदों में 20 रन बनाए और केवल दो ओवर गेंदबाजी की।
वह न तो बल्ले से रन बना रहे हैं और न ही उनकी गेंदबाजी में धार दिख रही है। वहीं दूसरे आलराउंडर रवींद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) की भी स्थिति ऐसी ही है। जडेजा ने 44 गेंद खेलीं और केवल 27 रन बनाए। गेंद से भी निराश किया। जडेजा ने वनडे में अंतिम विकेट पिछले साल छह दिसंबर को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ लिया था। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन और न्यूजीलैंड के खिलाफ दो वनडे में केवल एक विकेट उनके नाम है।
यानी पिछले पांच वनडे में उन्होंने सिर्फ एक विकेट लिया है। यह आलराउंडर प्रेम टेस्ट मैचों में भी टीम पर भारी पड़ा था। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज में शार्दुल और नीतीश को मौका दिया गया, लेकिन दोनों ही बेअसर रहे। टीम को इस समय निचले क्रम में विशुद्ध हिटर की कमी खल रही है।
टी-20 में यह काम हार्दिक पांड्या बखूबी करते हैं, लेकिन वनडे में उनके नहीं होने के कारण टीम भारी बोझ में दबी हुई है।
मिशेल का कैच टपकाना पड़ा भारी
इस मुकाबले में शतक जड़ने वाले डेरिल मिशेल का कैच टपकाना भी टीम को भारी पड़ा गया। 36वें ओवर में प्रसिद्ध कृष्णा ने मिशेल का कैच छोड़ा, जब वह 82 रन पर बल्लेबाजी कर रहे थे। जब तक मिशेल क्रीज पर थे, दर्शकों को प्रसिद्ध का यह कैच टपकाना याद आ रहा था।
मिशेल ने स्पिनरों के खिलाफ विशेषतौर पर स्वीप और रिवर्स स्वीप में काफी रन बटोरे। 96 गेंदों में अपने वनडे करियर का आठवां शतक लगाया और न्यूजीलैंड को सीरीज में बनाए रखा। कुलदीप महंगे साबित हुए लेकिन उनके ओवरों पर दो कैच छूटे। यंग का कैच रोहित शर्मा ने छोड़ा।
दबाव में राहुल ने दिखाया दम
इससे पहले जब भारतीय टीम संकट में थी तो केएल राहुल (KL Rahul) ने अविजित शतक जमाया और टीम को लड़ने लायक स्कोर तक पहुंचाया। राहुल ने 92 गेंदों पर नाबाद 112 रन बनाए, जिसमें 11 चौके और दो छक्के शामिल थे। राहुल ने पारी के दूसरे हिस्से में अहम साझेदारियां करते हुए उस समय टीम को संभाला, जब न्यूजीलैंड के गेंदबाजों ने भारतीय बल्लेबाजी क्रम को झकझोर दिया था। एक समय भारत का स्कोर एक विकेट पर 99 रन से चार विकेट पर 118 रन हो गया था।
पिच की धीमी गति और उछाल की कमी के कारण बल्लेबाजों को रन बनाने में काफी परेशानी हो रही थी। राहुल की यह पारी तकनीक, धैर्य और जज्बे का शानदार उदाहरण थी। राहुल ने 49वें ओवर की अंतिम गेंद पर छक्के के साथ अपना शतक पूरा किया और इसके साथ ही वह न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे में शतक लगाने वाले भारत के पहले विकेटकीपर भी बन गए। इसके अलावा वह राजकोट में शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज भी बन गए।
गिल का दूसरा अर्धशतक
राहुल के अलावा गिल (Shubman Gill) की पारी भी टीम के लिए सकारात्मक रही। कप्तान शुभमन गिल ने भी जिम्मेदारी निभाते हुए 53 गेंदों पर 56 रन बनाए। यह उनका लगातार दूसरा अर्धशतक था।
गिल ने पिच की परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढाला और नौ चौकों तथा एक छक्के की मदद से पारी को गति दी। न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाजों ने सटीक लाइन और लेंथ से शुरुआत में दबाव बनाया। रोहित शर्मा को खाता खोलने में 11 गेंदें लगीं। उन्होंने 24 रन बनाए, जिसमें कवर के ऊपर से लगाया गया शानदार ड्राइव आकर्षण का केंद्र रहा।
दूसरे मैच में वह बड़ा शॉट खेलने के प्रयास में आउट हो गए। इस बार क्रिस्टियन क्लार्क की गेंद पर डीप कवर पर आसान कैच दे बैठे। शुभमन गिल अच्छी लय में दिख रहे थे, लेकिन काइल जैमीसन की धीमी और छोटी गेंद को गलत समझ बैठे।
उन्होंने पुल शॉट खेला, जो सीधे डेरिल मिशेल के हाथों में गया। इसके बाद श्रेयस अय्यर भी ज्यादा देर टिक नहीं पाए और क्लार्क की गेंद पर मिड आफ पर कैच दे बैठे। स्टेडियम में उस समय सन्नाटा छा गया, जब विराट कोहली एक साधारण सी गेंद पर आउट हो गए। आफ स्टंप के बाहर जाती गेंद उनके बल्ले का अंदरूनी किनारा लेकर सीधे मिडिल स्टंप पर जा लगी। कोहली ने पहली ही गेंद पर चौका लगाया था, लेकिन दूसरे छोर से लगातार गिरते विकेटों ने उनकी लय को प्रभावित किया।


