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राजस्थान SIR : मतदाता सूची में हेर-फेर पर क्यूं छिड़ा घमासान- कांग्रेस नेताओं ने किसे दी चेतावनी ?

राजस्थान में SIR प्रक्रिया को लेकर जबरदस्त सियासी घमासान छिड़ गया है। बीते दिनों जयपुर में एक वायरल वीडियो ने SIR प्रक्रिया को विवादों में ला दिया। इसमें बीएलओ अपने सीनियर अधिकारियों पर मुस्लिम इलाके में वोटर लिस्ट में से जबरन नाम कटवाने का दबाव देने का आरोप लगा रहा था। कांग्रेस पहले ही SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाती रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस करके आरोप लगाए कि बीजेपी ने SIR प्रक्रिया में कांग्रेस के वोटरों के नाम जानबूझ कर कटवाए हैं। अब कांग्रेस इस मामले को लेकर अफसरों पर भड़क गई है। कांग्रेस का कहना है कि SIR प्रक्रिया के अंतिम दिन EROs के जरिए BLOs पर दबाव डाला गया कि वे कांग्रेस समर्थित मतदाताओं के नाम काटें। कई जगहों पर फॉर्म-7 पहले से भरे हुए BLOs को दिए गए, जो निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर सीधा हमला है। जहां अधिकारियों और BLOs ने इस साजिश का हिस्सा बनने से इनकार किया, वहां उन्हें तबादलों की धमकियां दी गईं।

गहलोत बाेले अफसर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें
पूर्व सीएम अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राजस्थान में एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े अफसरों को सीधी चेतावनी दे दी है। गहलोत ने कहा कि सरकार आती-जाती रहेंगी लेकिन नियम विरुद्ध काम किया तो नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहें।

गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र के लिए यह एक काले अध्याय जैसा है, जिसने भाजपा सरकार की कार्यशैली को उजागर कर दिया है। सत्ता के मद में चूर भाजपा सरकार ने प्रशासन का दुरुपयोग कर मतदाता सूचियों में हेराफेरी का जो षड्यंत्र रचा है, वह शर्मनाक है। SIR प्रक्रिया के अंतिम दिन, एक सुनियोजित साजिश के तहत EROs के माध्यम से BLOs पर दबाव डाला गया कि वे कांग्रेस विचारधारा वाले मतदाताओं के नाम काटें।
यहां तक कि फॉर्म-7 में पहले से डेटा भरकर BLOs को थमाया गया, जो सीधे तौर पर निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर हमला है। कई जगहों पर प्रशासनिक अधिकारियों और BLOs ने इस लोकतंत्र की हत्या में शामिल होने से इंकार किया तो उन्हें सत्ताधारी पार्टी के लोगों ने तबादलों की धमकी दी है। भाजपा ने ऐसा दुस्साहस कर जनता और लोकतंत्र का अपमान किया है। मेरे निर्वाचन क्षेत्र सरदारपुरा तक में ऐसा कुप्रयास किया गया है। मैंने राज्य निर्वाचन आयुक्त नवीन महाजन से फोन पर बात कर इस संबंध में जानकारी दी है एवं त्वरित कार्रवाई की मांग की है। मैं उन अधिकारियों को भी स्पष्ट शब्दों में आगाह करना चाहता हूं जो भाजपा के दबाव में संविधान की धज्जियां उड़ा रहे हैं, समय बदलते देर नहीं लगती। सरकारें आती-जाती रहेंगी, लेकिन अगर आपने नियम विरुद्ध कार्य किया, तो कानून के दायरे में आपकी जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी और सख्त कार्रवाई होगी। संवैधानिक मर्यादा का पालन करें, अन्यथा परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें।

डोटासरा बोले बीजेपी की भाषा बोलने वाले अफसरों पर करवाएंगे FIR
वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े अफसरों को सीधे तौर पर चेतावनी दे दी। डोटासरा बोले- मैं उन तमाम अधिकारियों को आगाह करता हूं जो नियमों को ताक पर रखकर भाजपा की भाषा बोल रहे हैं। अगर ज़रा भी बेईमानी पकड़ी गई, तो FIR दर्ज कराई जाएगी। कांग्रेस पीछे हटने वाली नहीं है। साथ ही सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से निवेदन करता हूं कि लोकतंत्र की रक्षा की जितनी जिम्मेदारी विपक्ष की है, उतनी ही जिम्मेदारी एक जागरूक नागरिक के तौर पर आपकी भी है। सत्ता अस्थायी होती है, लेकिन संविधान और कानून स्थायी हैं। भाजपा ने पहले परिसीमन में बेईमानी की, अब खुलेआम वोट काटने की साज़िश रची जा रही है, और वार्डों के प्रकाशन में भी धांधली की जा रही है। भाजपा सरकार ये भी जवाब देना चाहिए 8 जनवरी तक वार्डों का प्रकाशन क्यों नहीं किया गया? किसके दबाव में देरी हुई?

नेता प्रतिपक्ष : ‘संविधान की नौकरी करें, भाजपा की नहीं’
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली कहा कि एसआईआर प्रक्रिया में अफसरों की मिलिभगत का मामला विधानसभा में उठाया जाएगा। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “बाबा साहब अंबेडकर के संविधान और नियमों की पालना कराना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। यदि आप दबाव में काम कर रहे हैं या भाजपा के एजेंट बन गए हैं, तो नौकरी छोड़ दें। हम गलत करने वाले हर अधिकारी के खिलाफ पूरी कांग्रेस पार्टी के साथ खड़े रहेंगे और आगामी विधानसभा सत्र (28 जनवरी) में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाएंगे।”

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