
राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की भारी कमी है। स्थिति यह है कि यहां के संस्थानों में 54 छात्रों पर एक शिक्षक उपलब्ध हैं। दूसरी तरफ, पूरे देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में 23 छात्रों पर ही एक शिक्षक उपलब्ध हैं। हालात यह है कि उच्च शिक्षा में छात्र शिक्षक अनुपात के मामले में झारखंड बिहार से ही कुछ बेहतर स्थिति में है।
झारखंड के अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में तो स्थिति कुछ ठीक है। यहां के विश्वविद्यालयों और कालेजों में तो शिक्षकों की उपलब्धता और भी कम है। स्थिति यह है कि यहां के विश्वविद्यालयों और कालेजों में 60 छात्रों पर एक शिक्षक उपलब्ध है, जबकि पूरे देश में यह अनुपात 24 ही है।
विश्वविद्यालयों और कालेजों में शिक्षकों की कमी का असर न केवल सकल नामांकन अनुपात पर पड़ता है, बल्कि विद्यार्थियों को दी जा रही शिक्षा पर भी पड़ता है। झारखंड विधानसभा में प्रस्तु़त की गई झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण-2024-26 में भी इस स्थिति पर चिंता प्रकट की गई।
इसमें कहा गया कि लंबे समय से राज्य के विश्वविद्यालयों एवं कालेजों में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से यह स्थिति बनी है। एआइएसएचई-2021-22 की रिपोर्ट के आधार पर इस सर्वेक्षण में आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं।
इस अवधि के बाद भी राज्य के विश्वविद्यालयों और कालेजों में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है, इसलिए माना जा रहा है कि इस आंकड़े में अभी तक कोई बदलाव नहीं आया है।
बताते चलें कि राज्य के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है। सहायक प्राध्यापकों के लगभग आधे पद रिक्त हैं तो सह प्राध्यापक एवं प्राध्यापक नहीं के बराबर हैं। यह स्थिति राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में है। इधर, सर्वोच्च न्यायालय ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक पदों को चार माह के भीतर भरने के सख्त निर्देश दिए हैं।



