गणेश चतुर्थी पर इस विधि से करें पूजा, यहां पढ़ें शुभ मुहूर्त और भोग से लेकर सबकुछ

वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 22 जनवरी को गणेश चतुर्थी मनाई जा रही है। इस दिन विधिपूर्वक भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही जीवन के दुखों से मुक्ति पाने के लिए व्रत भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन गणपति बप्पा की साधना करने से सभी कामों में सफलता प्राप्त होती है। साथ सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। ऐसे में आइए जनते हैं कि गणेश चतुर्थी का शुभ शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में।
गणेश चतुर्थी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचां की गणना के अनुसार,आज यानी 22 जनवरी को गणेश चतुर्थी मनाई जा रही है।
माघ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत- 22 जनवरी को रात 02 बजकर 47 मिनट पर
माघ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का समापन- 23 जनवरी 2026 को रात 02 बजकर 28 मिनट
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त- 05 बजकर 27 मिनट से 06 बजकर 20 मिनट पर
अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट पर
गोधूलि मुहूर्त- शाम 05 बजकर 49 मिनट से 06 बजकर 16 मिनट पर
विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 19 मिनट से 03 बजकर 02 मिनट पर
गणेश चतुर्थी पूजा विधि
गणेश चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें
सूर्य देव को अर्घ्य दें
मंदिर की सफाई करें।
चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।
भगवान गणेश की प्रतिमा को स्थापित करें।
चंदन, दूर्वा, फूल, धूप, दीप अर्पित करें।
देसी घी का दीपक जलाएं और आरती करें।
व्रत कथा का पाठ करें।
फल और मोदक का भोग लगाएं।
अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करें।
इन चीजों का लगाएं भोग
गणेश चतुर्थी के दिन गणपति बप्पा को मोदक, गुड, नारियल, खीर और फल समेत आदि चीजों का भोग लगाएं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन चीजों को भोग में शामिल करने से साधक की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
गणेश जी की आरती
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी,
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी।जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा।
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी,
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी।
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।



