झारखंडराज्य

झामुमो ने समय से पहले खोल दिया ‘पत्ता’, गठबंधन के सुर हुए बेसुरे; सियासी हलचल तेज

आदित्यपुर नगर निगम चुनाव की डुगडुगी अभी ठीक से बजी भी नहीं है, लेकिन सियासी गलियारों में म्यूजिकल चेयर का खेल शुरू हो गया है।

हालात ऐसे हैं कि महागठबंधन रूपी परिवार में ‘नाराज फूफा’ वाला दृश्य दिखने लगा है। इधर, झामुमो ने दूल्हे का एलान कर दिया, उधर बाराती (कांग्रेस-राजद) अभी कपड़े ही इस्त्री कर रहे हैं। कुल मिलाकर आदित्यपुर की राजनीति में इन दिनों कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना वाला माहौल है।

सबसे पहले बात उनकी, जिन्होंने पहला पत्ता फेंककर खेल बिगाड़ दिया। झामुमो ने आव देखा न ताव, मेयर पद के लिए भुगलु सोरेन उर्फ डब्बा सोरेन के नाम का बम फोड़ दिया। साथ ही वार्ड प्रत्याशियों की लिस्ट भी थमा दी। अब हालत यह है कि महागठबंधन के सहयोगी दल कांग्रेस और राजद समझ नहीं पा रहे कि वे इस बारात में नाचें या घर लौट जाएं।

झामुमो का यह डब्बा खुलते ही पार्टी के अंदर भी खलबली मची है। टिकट से वंचित दावेदार केंद्रीय सदस्य गणेश चौधरी और जिला अध्यक्ष शुभेंदु महतो की ऐसी परिक्रमा कर रहे हैं, मानो किसी मंदिर में मन्नत का धागा बांधने आए हों।

भाजपा में एक अनार, सौ बीमार
इधर, विपक्षी खेमे यानी भाजपा में स्वयंवर जैसी स्थिति है। मेयर की कुर्सी एक है और दावेदार अनेक। तीन बार की पार्षद प्रभाषिनी कालुंडिया, रमेश हांसदा, बास्को बेसरा, संजय सरदार और ब्रजोराम हांसदा ताल ठोक रहे हैं।

टिकट पक्का करने के लिए ये नेता कभी अर्जुन मुंडा तो कभी चंपाई सोरेन के दरबार में हाजिरी लगा रहे हैं। 24 जनवरी को सरायकेला में रायशुमारी होगी, जिसमें तय होगा कि दिल्ली दरबार किसका नाम भेजा जाए।

कांग्रेस-राजद: जाएं तो जाएं कहां?
झामुमो की हड़बड़ी से राजद और कांग्रेस पशोपेश में हैं। राजद ने बैठक कर कहा था कि हम सर्वसम्मति से उम्मीदवार देंगे, लेकिन झामुमो ने उनकी सम्मति का इंतजार ही नहीं किया।

वहीं, कांग्रेस नेता जगदीश नारायण चौबे दार्शनिक अंदाज में विकास और जनसुविधाओं की बातें कर रहे हैं, लेकिन असली दर्द यह है कि अब प्रभारी मंत्री राधाकृष्ण किशोर से बात करने के बाद ही तय होगा कि गठबंधन धर्म निभाना है या एकला चलो रे की राह पकड़नी है। फिलहाल, आदित्यपुर में सर्दी के मौसम में सियासी पारा सातवें आसमान पर है।

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