
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि उनकी सरकार राज्य के युवाओं, विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के बंद दरवाजे खोलने में लगी है। झारखंड में नीतियां नहीं बन पाई थीं, जिससे विद्यार्थी आगे नहीं बढ़ पा रहे थे। वे नीतियां और नियमावलियां बनाकर उन बंद दरवाजे को खोलने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे पास सब कुछ है। हमारे पास कोई ऐसी चीज नहीं है जो हमें आगे बढ़ने से रोक सकती है। संसाधन के मामले में हम अपने देश में कई राज्यों से आगे हैं। बस हम बौद्धिक रूप से कमजोर पड़ते हैं। आज इसी बौद्धिक क्षमता को बढ़ाने का उनका पूरा प्रयास है।
मुख्यमंत्री शनिवार को लंदन के वेस्टमिन्स्टर चैपल स्थित सभागार में आयोजित झारखंड की 25वीं जयंती समारोह में उपस्थित झारखंड के विद्यार्थियों एवं प्रबुद्ध नागरिकों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सभी का जोहार करते हुए उनका अभिनंदन और स्वागत किया।
मुख्यमंत्री ने मरांग गोमके पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना के लाभुक विद्यार्थियों से कहा कि वे पहली बार वहां आए हैं। उनके आने से पहले उन्होंने उन लोगों को वहां भेजा और उनकी इस हिम्मत, साहस और इस उत्साह की वजह से ही शायद वे वहां पहुंचे हैं।
उन्होंने कहा कि उन्हें तो वेस्टमिन्स्टर चैपल सभागार का नाम भी नहीं पता था। उनके लिए बड़े सौभाग्य की बात है कि उन्हें वहां बोलने का मौका मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड इतिहास से भरा राज्य है, जहां मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा, उससे पहले भगवान बिरसा मुंडा, सिदो कान्हू, चांद भैरव, फूलो झानो का संघर्ष और आदरणीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन का संघर्ष हमें देखने को मिलता है।
इतिहास लिखना आसान लेकिन बनाना मुश्किल
इतिहास लिखना बहुत आसान है। इतिहास पढ़ना बहुत आसान है, पर इतिहास बनाना बहुत कठिन है। कहा, झारखंड का इतिहास भी गौरवपूर्ण इतिहास है। हमारे पूर्वज शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाए थे, लेकिन उनमें दूरदर्शिता थी। यह बहुत दूर की चीजों को जानते थे, समझते थे और उसी अनुरूप अपने जीवन शैली और कार्यशैली को अंजाम देते थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुआयामी शिक्षा आज के इस तकनीकी युग में बहुत आवश्यक है। उनकी यही सोच रही है कि जो हमारे पूर्वज रहे हैं उनके सपनों को पूरा करें। जो उनका संघर्ष रहा, जो उनके संघर्ष का कारण था, उन वजहों का कैसे हम समाधान करें, उसके साथ हम आगे बढ़ें।
आखिर उन्होंने क्यों अपनी कुर्बानियां दी? क्यों उन्होंने अपने को बलिदान किया? वह इसलिए, क्योंकि वो हमें सुरक्षित करना चाहते थे। हम अपने पैरों पर खड़ा हो, हम अपने को मजबूत कर पाएं, यही उनकी सोच रही होगी।
उन्होंने कहा कि वे झारखंड के विद्यार्थियों को देखकर जाे आत्म संतुष्टि हो रही है, उसे बयां नहीं कर सकते। वे वहां हिंदी में भाषण दे रहे हैं, लेकिन विद्यार्थियों को अंग्रेजी में भाषण देते हुए देख उन्हें गौरव महसूस हो रहा है।
वे चाहते हैं कि हमारी आने वाली पीढ़ी इसी तरीके से आगे और तरक्की करे। इस 25 वर्ष के बाद हम अगले 25 वर्ष के लिए आनेवाली पीढ़ी के लिए लंबे और मजबूत रोडमैप के साथ आगे आएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहला कदम है, जब एक जनजातीय राज्य से एक जनजातीय प्रतिनिधि दावोस से लेकर लंदन तक पहुंचा है। निश्चित रूप से आगे भी जाएंगे और आत्म विश्वास के साथ
जाएंगे।
शिक्षा में नहीं आने देंगे आर्थिक अड़चन, उन उंचाइयों तक जाएं जहां तक जा सकें
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में शिक्षा को लेकर कई चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों के बीच में हम आनेवाली पीढ़ी को सशक्त करने, उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। इसलिए नहीं कि उन्हें सरकारी नौकरी चाहिए। हम उनको इस तरह तराशना चाहते हैं कि देश दुनिया का कोई भी कंपटीटिव, सिचुएशन हो, वो उसका सामना कर पाएं।
आज के वक्त के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें। हम शिक्षा में कोई आर्थिक अड़चन आने नहीं देंगे। आज स्कूली स्तर पर सीएम स्कूल आफ एक्सेलेंस प्रारंभ किया है। हमने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के लिए बड़े पैमाने पर दरवाजे खोले हैं।
प्रोफेशनल कोर्सेस के लिए हमने गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड को भी लांच किया है, जिसके माध्यम से 15 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता बैंकों के माध्यम से बहुत ही कम ब्याज दर पर दी जाती है।
लंदन में पढ़ाई के लिए उन सभी को भेजने का उद्देश्य सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि उनकी क्षमता को ताकत देने का प्रयास है। आप उन ऊंचाइयों तक जाएं, जहां तक आप जा सकें। मरांग गाेमके पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना ईंधन का काम कर रही है।
पॉजिटिव डायरेक्शन में ले जाना चाहे हैं युवा झारखंड को
मुख्यमंत्री ने झारखंड की रजत जयंती का जिक्र करते हुए कहा कि 25 साल के इस युवा राज्य में पूरी ताकत है, पूरी क्षमता है। इस नौजवान राज्य की क्षमता को वे एक पॉजिटिव डायरेक्शन में ले जाने का कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि अगर लक्ष्य ठीक से नहीं साधा गया तो पूरी मेहनत पानी में चला जाएगी।




