
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर मंगलवार को ओडिशा समेत पूरे देश में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारी हड़ताल पर रहे। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में बैंकिंग सेक्टर में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करना और अन्य लंबे समय से लंबित मुद्दों का समाधान शामिल है।
लगातार चौथे दिन जारी इस आंदोलन के चलते बैंकिंग सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं। ओडिशा के कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कर्मचारियों के काम पर न आने से सेवाएं आंशिक से लेकर लगभग पूरी तरह ठप रहीं, जिससे ग्राहकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
बैंक अधिकारियों के मुताबिक, हड़ताल के कारण नकद जमा, चेक क्लीयरेंस और काउंटर आधारित अन्य जरूरी सेवाएं प्रभावित हुईं। इसके अलावा ऋण स्वीकृति, खाते से जुड़ी सेवाओं और अन्य नियमित बैंकिंग कार्यों में भी देरी हुई। यूएफबीयू ने कहा कि यह आंदोलन लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर किया जा रहा है, जिसमें पांच दिवसीय कार्य सप्ताह प्रमुख मुद्दा है।
यूनियन नेताओं का कहना है कि बार-बार सरकार और संबंधित अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिससे कर्मचारियों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ा। हड़ताल पर बैठे एक बैंक कर्मचारी ने बताया कि सरकार ने करीब पांच साल पहले बैंकिंग क्षेत्र में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक यह पूरा नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि शनिवार को अवकाश घोषित किया जाए। जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
हालांकि डिजिटल बैंकिंग सेवाओं के चलते ग्राहकों को कुछ हद तक राहत मिल सकती है, लेकिन यूनियन नेताओं का अनुमान है कि हड़ताल के कारण ओडिशा में बैंकिंग क्षेत्र को करीब 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। एक अन्य बैंक कर्मचारी ने बताया कि इंडियन बैंक्स एसोसिएशन स्तर पर मांगों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन मामला अब भी सरकार के स्तर पर लंबित है।




