जया एकादशी पर बन रहे कई दुर्लभ योग

पंचांग के अनुसार, आज यानी 29 जनवरी को माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। इस तिथि पर जया एकादशी व्रत किया जाता है और भगवान विष्णु जी की पूजा होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से सभी पाप दूर होते हैं। जया एकादशी पर कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं आज का पंचांग के बारे में।
तिथि: शुक्ल एकादशी
मास पूर्णिमांत: माघ
दिन: गुरुवार
संवत्: 2082
तिथि: शुक्ल एकादशी – दोपहर 01 बजकर 55 मिनट तक
योग: इंद्र – सायं 08 बजकर 27 मिनट तक
करण: विष्टि – दोपहर 01 बजकर 55 मिनट तक
करण: बव – 30 जनवरी को रात्रि 12 बजकर 32 मिनट तक
सूर्योद और सूर्यास्त का समय
सूर्योदय का समय: प्रातः 07 बजकर 11 मिनट पर
सूर्यास्त का समय: सायं 05 बजकर 58 मिनट पर
चंद्रोदय का समय: दोपहर 02 बजे
चंद्रास्त का समय: 30 जनवरी को रात्रि 04 बजकर 55 मिनट पर
सूर्य और चन्द्रमा की राशियां
सूर्य देव: मकर राशि
चन्द्र देव: वृषभ राशि
आज के शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 56 मिनट तक
अमृत काल: रात्रि 09 बजकर 26 मिनट से रात्रि 10 बजकर 54 मिनट तक
आज के अशुभ समय
राहुकाल: दोपहर 01 बजकर 55 मिनट से दोपहर 03 बजकर 16 मिनट तक
गुलिकाल: प्रातः 09 बजकर 53 मिनट से प्रातः11 बजकर 14 मिनट तक
यमगण्ड: प्रातः 07 बजकर 11 मिनट से प्रातः 08 बजकर 32 मिनट तक
आज का नक्षत्र
आज चंद्रदेव रोहिणी नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
रोहिणी नक्षत्र: प्रातः 07 बजकर 31 मिनट तक
सामान्य विशेषताएं: कला प्रिय, रचनात्मक, रोमांटिक, व्यावसायिक समझ, ऐश्वर्यप्रिय, जिद्दी, व्यवहारिक, भोग-विलासी, दिखावटी, बड़ी आंखें, ईमानदार, उदार, दानशील, संवाद-कुशल, एकाग्रचित्त, और शांत स्वभाव
नक्षत्र स्वामी: चंद्र देव
राशि स्वामी: शुक्र देव
देवता: ब्रह्मा देव या प्रजापति
प्रतीक: गाड़ी का पहिया
जया एकादशी का धार्मिक महत्व
जया एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी व्रत मानी जाती है। यह माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आती है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करने से भय, पाप और कष्टों से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि जया एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को जीवन में विजय, शुद्धता और आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है। इस दिन उपवास, स्नान, ध्यान और विष्णु सहस्रनाम का पाठ विशेष फलदायी होता है। जया एकादशी मोक्ष की ओर ले जाने वाली एक महत्वपूर्ण एकादशी मानी गई है।
जया एकादशी व्रत विधि
प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें स्वच्छ व पीले वस्त्र धारण करें।
घर के मंदिर में भगवान विष्णु की पूजा की तैयारी करें।
गंगाजल से पूजा स्थान का शुद्धिकरण करें दीपक जलाकर भगवान विष्णु का ध्यान करें।
तुलसी दल, पीले फूल, फल और नैवेद्य अर्पित करें विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
एकादशी व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें।
दिन भर उपवास रखें, सामर्थ्य अनुसार निर्जल या फलाहार करें शाम को भगवान विष्णु की आरती करें।
अगले दिन द्वादशी तिथि पर व्रत का पारण करें।




