राजस्थानराज्य

अवैध खनन मामले में एनजीटी सख्त, डीएफओ अलवर से व्यक्तिगत शपथपत्र तलब

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी), केंद्रीय क्षेत्र पीठ, भोपाल ने राजस्थान में वन भूमि में अवैध खनन से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। यह मामला मूल आवेदन संख्या 91/2025 (सीजेड) गजेन्द्र सिंह नरूका बनाम भारत संघ व अन्य से संबंधित है। यह मामला राजस्थान के अलवर जिल में वन भूमि के भीतर अवैध खनन गतिविधियों से संबंधित है, जिसकी जांच संयुक्त समिति की रिपोर्ट के आधार पर की जा रही है। सुनवाई के दौरान यह गंभीर आरोप लगाए गए कि स्थानीय वन अधिकारियों की लापरवाही अथवा मिलीभगत के कारण वन क्षेत्र में खनन की अनुमति दी गई। एनजीटी ने इस तथ्य पर भी संज्ञान लिया कि पूर्व में वन विभाग द्वारा एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) जारी किए गए थे, जबकि बाद में उन्हीं क्षेत्रों को वन भूमि घोषित किया गया, जिससे विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल उठते हैं।

अधिकरण ने प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ), अलवर को निर्देश दिया है कि वे स्थिर संदर्भ बिंदुओं और वास्तविक माप के आधार पर तथ्यों का विवरण देते हुए, एनओसी बिना उचित सत्यापन जारी करने के कारणों को स्पष्ट करते हुए व्यक्तिगत शपथपत्र प्रस्तुत करें।

एनजीटी ने आदेश की प्रति प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) एवं हेड ऑफ फोरेस्ट फोर्स (HoFF) को भेजने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि वन विभाग की विरोधाभासी रिपोर्टों पर कार्रवाई हो सके। साथ ही PCCF और HoFF को संबंधित क्षेत्र की वैज्ञानिक पद्धति से पहचान, सीमांकन और सीमा स्तंभ स्थापित करने के लिए भी निर्देशित किया गया है। प्रतिवादियों को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। अगली सुनवाई 26 फरवरी 2026 को होगी।

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