
सितारगंज से टनकपुर के लिए बनने वाले 50 किमी के फोरलेन में अब भूमि के अधिग्रहण की तैयारी तेज हो गई है। इसके लिए सर्वे कर रही कंपनी ने भूमि अधिग्रहण करने के लिए भू चिन्हिकरण शुरू कर दिया है। अप्रैल तक इसको फाइनल टच दिया जाएगा। उसके बाद डीपीआर बनाकर फोरलेन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इ
सके लिए साढ़े तीन करोड़ रुपये सर्वे करने वाली कंपनी पाइनर को दिया गया है। सितारगंज-टनकपुर फोरलेन होने से उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र के साथ उप्र के लिए भी आवागमन सुगम हो जाएगा। किसी भी क्षेत्र के विकास में मार्ग का महत्व बहुत होता है। ऊधम सिंह नगर जिले में तीन जगह औद्योगिक आस्थान (सिडकुल) स्थापित किए गए, पहला रुद्रपुर में और दूसरा सितारगंज व तीसरा काशीपुर में। काशीपुर और रुद्रपुर फोरलेन से जुड़ चुके हैं। लेकिन सितारगंज में कई मार्ग आज भी टू-लेन ही हैं।
ऐसे में सितारगंज क्षेत्र में सामान्य आवागमन के साथ-साथ इंडस्ट्रियल वाहनों की आवाजाही में काफी दिक्कत आ रही है। खनन कार्य के दौरान तो यह परेशानी और भी बढ़ जाती है। सबसे ज्यादा चौड़ीकरण की जरूरत सितारगंज-टनकपुर हाईवे को लेकर हो रही थी। जिस पर काम कुछ महीने पहले ही शुरू हो चुका है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने पाइनर कंपनी को इस टू-लेन को फोरलेन करने के लिए सर्वे का काम सौंपा है। इसके लिए कंपनी को साढ़े तीन करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
सितारगंज से टनकपुर का यह हिस्सा करीब 50 किमी की दूरी का है। सर्वे कंपनी ने मार्ग को फोरलेन करने में कितनी कृषि व अन्य प्रजोज्य भूमि उसके दायरे में आ रही है उसका सर्वे शुरू कर दिया है। प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण से पूर्व भू-चिन्हींकरण जरूरी है। उस भूमि की मौजूदा लागत व अन्य तमाम तकनीकि पहलुओं का अध्ययन करने के बाद भी उसके अधिग्रहण की प्रक्रिया की जाएगी। भूमि फाइनल होने के बाद संबंधित विभाग अथवा किसानों को मुआवजा आदि के मानक तय होंगे।
पहाड़ के साथ उप्र की राह होगी आसान
सितारगंज से टनकपुर तक फोरलेन बन जाने से चंपावत और इधर पीलीभीत होते हुए उप्र की राह आसान हो जाएगी। टनकपुर से चंपावत के लिए मार्ग पहले ही चौड़ा हो चुका है जबकि पीलीभीत जाने वाला मार्ग भी काफी चौड़ा है। लेकिन सितारगंज से टनकपुर तक का 50 किमी का यह हिस्सा टू लेन होने से बहुत संकरा है। इस मार्ग से मां पूर्णागिरी के दर्शन के लिए भी तमाम भक्त चौपहिया व दोपहिया वाहनों से गुजरते हैं। ऐसे में यहां बहुत दिक्कत होती है। इसके बनने से मां पूर्णागिरी के दर्शन भी सुलभ हो जाएंगे।
इस हाईवे पर हर रोज गुजरते हैं 16 हजार वाहन
सितारगंज से टनकपुर हाईवे को फोरलेन करने से पहले भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने वाहन सेसेंक्स पूरा कर लिया है। इसके मुताबिक मौजूदा समय में इस हाईवे से करीब 16 हजार वाहन हर रोज गुजरते हैं। जबकि फोरलेन बनाने के लिए करीब 20 हजार वाहनों के प्रतिदिन गुजरने का मानक होना चाहिए। प्राधिकरण के डिप्टी मैनेजर मोहित कुशवाह का कहना है कि जिस तेजी से इस मार्ग पर वाहनों का दवाब बढ़ रहा है उस हिसाब से जब तक फोरलेन बनेगा तब तक वाहनों के गुजरने का आंकड़ा 20 हजार हो जाएगा।
पाइनर कंपनी सितारगंज -टनकपुर हाईवे को फोरलेन बनाने की प्रक्रिया के तहत भूमि अधिग्रहण को ध्यान में रख भू-चिन्हींकरण कर रही है। उसके बाद डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनेगी। उसकी स्वीकृति के बाद काम शुरू करा दिया जाएगा।- अचल जिंदल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई



