
राजस्थान में बीते 2 वर्षों में सरकारी अस्पतालों में मेडिकल लापरवाही के कारण 12 मरीजों की मौत हुई। स्वास्थ्य विभाग ने विधानसभा में बताया कि 34 मेडिकल स्टाफ को निलंबित या बर्खास्त किया गया है। जयपुर के एसएमएस अस्पताल में गलत ब्लड ट्रांसफ्यूजन से दो मौतें हुईं। दो साल में 401 ब्लड सेंटरों की जांच की गई, 85 के लाइसेंस सस्पेंड और 7 रद्द किए गए। यह खुलासा राजस्थान विधानसभा में एक अतारांकित प्रश्न के जवाब में हुआ है।
राज्य सरकार ने विधानसभा में अतारांकित प्रश्न के जवाब में बताया कि वर्ष 2023 से 2025 के बीच प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मेडिकल लापरवाही के कारण कम से कम 12 मरीजों की मौत हुई है। इन मामलों में अब तक 34 चिकित्सा कर्मियों को निलंबित या सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। छबड़ा विधायक प्रताप सिंह सिंघवी के सवाल के जवाब में स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में गलत ब्लड ट्रांसफ्यूजन के कारण दो मरीजों की मौत हुई। इनमें फरवरी 2024 में दौसा निवासी 23 वर्षीय सचिन शर्मा और मई 2025 में टोंक निवासी 23 वर्षीय चाइना देवी शामिल हैं। इस मामले में तीन डॉक्टरों और एक नर्सिंग स्टाफ को निलंबित किया गया है और जांच जारी है। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि बीते दो वर्षों में प्रदेश के 401 ब्लड सेंटरों का निरीक्षण किया गया, जिनमें से 85 के लाइसेंस निलंबित किए गए, जबकि 7 के लाइसेंस रद्द कर दिए गए। इसके अलावा 272 ब्लड सेंटरों को नोटिस जारी किए गए।
विभाग ने यह भी बताया कि अन्य जिलों के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की मौत से जुड़े 10 मामलों में 20 डॉक्टरों और 11 नर्सिंग कर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है। वहीं, कोटा के सुकेत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 30 मई 2024 को गर्मी और अव्यवस्थाओं के कारण दो नवजातों की मौत के मामले में तीन डॉक्टरों को सीसीए नियम-17 के तहत नोटिस जारी किया गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले दो वर्षों में नकली या घटिया दवाओं के कारण राज्य में किसी भी मौत की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, इस अवधि में 69,609 मेडिकल स्टोर्स की जांच की गई, जिनमें 12,403 के लाइसेंस निलंबित और 1,637 के लाइसेंस रद्द किए गए। स्वास्थ्य विभाग ने 2023 से 2025 के बीच 20,770 दवाओं के सैंपल भी लिए, जिनमें से 435 दवाओं को घटिया गुणवत्ता का पाए जाने पर राज्य में प्रतिबंधित किया गया।



